राजा सुदीर की साहस कथा -(Part 8 of 9)

यह कहानी का आठवां भाग है। इस कहानी को मैंने 9 भागों में बाँटा  है। मुझे इन 9 शब्दों (राजा, शैतान, सेना, प्रजा, हाथी, घोडा, भाला, झंडा, लड़ाई) से  कहानी बनाने का  टास्क मिला था । जिस  कहानी को  मुझे दो पन्नों में लिखना था वह 2 , 3 , 4 , 5 . . . .   करते करते रजिस्टर के 30 पन्नों की बन गयी।  यह 30 पन्ने अचानक नहीं लिखे गये क्योंकि कई बार बिच बिच  में मैंने इस कहानी को लिखना छोड़ दिया था , फिर वह गैप कभी कभी एक दो महीनों की भी हो जाती थी ।  मै  लिखता गया , लिखता गया , लिखता ही गया ……..   और इसी लिखने के सफ़र में एक साल कैसे निकल गया मुझे पता ही नहीं चला।  ऐसे करते करते आख़िरकार इस कहानी को मैंने अंतिम मुक़ाम तक पहुंचा ही दिया। इस कहानी के चित्र मैंने और मेरी मम्मी ने बनाये , जिसे करीबन दो महीने लगे थे। आशा करता हूँ की आप इस कहानी के सारे भाग पढ़ेंगे और इसका लुफ़्त भी उठाएंगे। आपके सुझाव मुझे भविष्य में और बेहतर लिखने के लिए प्रेरणा देंगे। 

आरव राउत

 किबा टीबा का नाटक

तभी जादुई  गुरु गायब हो जाते है और कुछ जादुई  सैनिक आते है। जादुई सैनिको को देखकर जादूगर अकरम को बहुत ग़ुस्सा आता है क्यों की इन्होने ही जादूगर अकरम को मारा था।  जादूगर अकरम उसका गुस्सा रोक नहीं पाता और सीधा शुरिकेन निकाल कर उन्हें फेंक मारता है,  इससे उन्हें बहुत जोर का झटका लगता है। उसके ठीक बाद उस अंतरिक्ष के जमीन की रक्षा करने वाला एक जादूगर ,जादूगर अकरम के सामने आता है।

खतरनाक हथियार शुरीकेन

जादूगर अकरम उसे टेलीपोर्ट होकर शुरिकेन मारकर ख़तम कर देता है। जब वो उसे ख़तम करता है तो उसके ठीक बाद उस जमीन की रखवाली करने वाले जादूगर के ही जैसे २५ और जादूगर आते है।  जादूगर अकरम उन पर अपने सभी जादू इस्तेमाल कर रहा होता है जो उसने सीखे थे। तभी जादूगर अकरम को जादुई गुरु  की एक बात याद आती है की –

“तुम्हे ये जानवर लड़ाई में बहुत मदद करेंगे।”

तभी वो अपने हाथी को बुलाता है और कहता है की तुम बड़े हो जाओ और इन सबको कुचल दो। ये कहते ही हाथी बहुत बड़ा हो कर उन को कुचल देता है।   जादुई गुरु  उसे बोलते है की तुम परीक्षा में सफल रहे हो। ये सुनते ही जादूगर अकरम अपनी असली दुनिया में आ जाता है।

तभी जादूगर अकरम को वहा पर एक जहर वाला शुरिकेन दिखता है, उसे लगता है  की अगर वह शुरिकेन किसी को भी मारेगा तो वो  शुरिकेन के झटके से नहीं भी  मरा तो उसके जहर से जरूर मर जाएगा।  जादूगर अकरम उस शुरिकेन को ऐसा बना देता है की वह फेंकने पर खुद ब खुद उसके पास आ जाए।  इससे सांप भी मरेगा और लाठी भी नहीं टूटेगी।   अब जादूगर अकरम राजा सुदीर के पास जाता है और उससे कहता है की मै जादुई दुनिया से लौट आया हु।

उग्रराज उस क़ीमती हार को अभी तक ढूंढ रहा था लेकिन उसे अपना हार कही नहीं मिला।   एकदम उसे याद आया की गलती से उसने अपना हार उस जासूस को दे दिया था।  यह बात पता चलने से उग्रराज अपने होशो हवास में आ जाता है और मन ही मन खुश हो कर कहता है की अब हार की चिंता तो ख़तम हो गई है क्योकि वो तो मै कभी भी बुलवा सकता हु, बस राजा सुदीर अभी मेरे राज्य को छोड़कर निकल जाए।

राजा सुदीर के दिमाग में  एक योजना आती है जिससे उग्रराज का पूरा विश्वास हो जाए की अब राजा सुदीर उग्रराज का गोटासुर नहीं लेने वाला है।  राजा सुदीर ने उनके जैसे दिखने वाले उनके राज्य के सभी लोगों को उनके महल में बुलाने का आदेश देते है।   उनके महल में सिर्फ दोही लोग आए जो जुड़वा भाई थे जिनका नाम किबा और टीबा था।  वो दोनों आते ही राजा सुदीर का एक और आदेश आता है कि मुझे मेरे ही जैसा आवाज निकालने वाला आदमी भी चाहिए।  थोड़ी देर बाद किबा और टीबा को देखने के लिए खुद महरानी सुर्यांशी आती है मतलब राजा सुदीर की पत्नी, वो देखती है की टीबा की शक्ल राजा सुदीर की शक्ल से ज्यादा मिलती जुलती है और किबा की आवाज राजा सुदीर की आवाज से ज्यादा मिलती जुलती है।  तभी राजा सुदीर  का आदेश आता है की टीबा को मेरे शाही कपडे पहनने  का आदेश दो, उसे घोडे पर बिठाकर उग्रदेश की सिमा पर छोड़ दो और उसको सौम्य देश में आने के लिए कह दो।  महल में तुम किबा को राज सिंहासन के पीछे छुपने के लिए कह दो और उसे ये बोलने के लिए कहो की “मेरा सबसे अच्छा दोस्त जादूगर अकरम अब मर गया है और इस वजह से मै गोटासुर को उग्रराज से छीन  नहीं पाया और अपने घर वापस आ गया”।  ये कहने के बाद टीबा को वहासे जाने के लिए कहना।  यह आदेश मिलते ही  रानी सुर्यांशी काम पे लगती है।

 किबा टीबा का नाटक

यह पूरा नाटक होने के बाद राजा सुदीर ने जैसा सोचा था वैसा ही हुआ। उन्होंने सोचा था की उग्रदेश के सभी जासूस ये खबर सुनते ही खुश हो जाएंगे और दौड़ते दौड़ते उग्रराज के पास जाएंगे और उसे ये खबर सुनाएंगे।  वह खबर सुनके उग्रराज इतना खुश हो जायेगा, इतना खुश हो जायेगा की वो अपने जासूसों को इनाम देने से खुद को रोक नहीं पायेगा। लेकिन अभी उग्रराज के पास इनाम देने के लिए है भी क्या ? अभी तो उसके पास वो बेशकीमती हीरो से लदा हुआ हार भी तो नहीं है, अगर होता तो उसमें से वह एक एक हीरा अपने जासूसों को दे  देता।  इसलिए वह अपने निजी जादुई सैनिकों को कहता है की उस जासूस को ढूंढो  जिसको मैंने बेशुमार हीरो से लदा हुआ हार दिया था। उसको अभी के अभी तुरंत बुलाओ और साथ ही साथ मेरा वह कीमती हीरों से लदा हुआ हार भी। यह सुनकर उग्रराज के निजी जादुई सैनिक उस जासूस को ढूंढने में जी जान से जुट जाते है।

कुछ ही देर बाद उग्रराज के निजी जादुई सैनिकों को ये पता चलता है कि वह जासूस उग्रदेश में है ही नहीं।यह खबर जादुई  सैनिकों को  उग्रराज  को देने में डर लगता है, क्योंकि उन्हें पता था की वो बेशुमार हीरों से लदा हुआ हार कितना कीमती था और अगर उन्होंने ये बात उग्रराज को बता दी तो उसका ग़ुस्सा वह रोक नहीं पायेगा और उसी वक्त जादुई सैनिकों का सर कलम कर देगा।  इस वजह से  उग्रराज के निजी जादुई सैनिकों ने सोचा की क्यों ना हम राजा सुदीर के सैनिक बन जाये क्योंकि वह राजा भी अच्छा है और उग्रराज से भी बच जाएंगे।  जब उग्रराज के सभी निजी जादुई सैनिक राजा सुदीर के पास पहुंचे तो उन्होंने यह पूछा की तुम यहाँ पर क्यों आए हो ? 

सभी बताते है की हम उग्रराज के निजी जादुई सैनिक है, उसने हमें आदेश दिया था की तुम एक जासूस को ढूंढ के लाओ। तो हमने उस जासूस को ढूंढना शुरू किया लेकिन हमें बादमे पता चला कि वह जासूस उग्रदेश में है ही नहीं।  उस जासूस ने उग्रराज का एक क़ीमती हीरो से लदा बेशकीमती हार चुरा लिया था। अगर हम खाली हाथ लौटते है तो उग्रराज हमारा सर कलम कर देगा। इसलिए हम आपके शरण में आये है। 

निजी जादुई सैनिक
राजा सुदीर

यह बात सुनकर राजा सुदीर को उनपर दया आयी। आगे वह कहते है की हमें आपका निजी सैनिक बनकर आपकी सुरक्षा करनी है।  यह सुनकर राजा सुदीर को बहुत अच्छा लगता है।  उनमें से जो सबसे छोटा जादुई सैनिक था जिसका नाम हाचि था।  उसको राजा सुदीर कि एक परेशानी पता थी। और वह परेशानी थी  उग्रराज के जादुई महल में जो कदम कदम पे जादुई जाल थे।  इसी वक्त सभी उग्रराज के निजी जादुई सैनिक बोलते है की हमें आपका निजी सैनिक बनना है।  राजा सुदीर इस बात के लिए हामी भरते है और कहते है एक शर्त पर तुम्हे मै अपना निजी सैनिक बनाऊंगा। वो शर्त है तुम्हे हर वक्त मेरे साथ रहना पड़ेगा।  सभी तुरंत जवाब देते ठीक है। 

कुछ देर बाद राजा सुदीर खिड़की के पास खड़े होकर सोचने लगते है की वो जादुई जाल जो उग्रराज के महल में है वो कितने शक्तिशाली होंगे और मै उसे कैसे पार करूंगा ? राजा सुदीर को ऐसे सोचते हुए देख  हाचि पूछता है – क्या आप जादुई जाल के बारे में सोच रहे है ? राजा सुदीर बोलते है की हाँ, लेकिन मै उसे पार कैसे करूं ?  हाचि बोलता है की आपको वो जादुई जाल पार करने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि मुझे उग्रराज के जादुई महल में हर जगह जाने का एक सुरक्षित रास्ता पता है और अगर आप चाहे तो मै आपको एक सुरक्षित रास्ते का नक्शा देता हूँ जो उग्रराज के महल के बीचो बीच भी पहुंचाए और उग्रराज के कमरे तक भी। राजा सुदीर बोले नहीं,  मैंने महल के बीचो बीच जाने के लिए सुरंग खुदवा रखी है। तभी हाचि राजा सुदीर को बोलता है की वह जादुई जाल महल के नीचे भी है। राजा सुदीर बोले नहीं, तुम झूठ बोल रहे हो।  अगर ऐसा होता तो सुरंग खोदने वालों की अभी तक मौत हो जाती।  हाचि बोलता है की मै सच बोल रहा हूँ मै खुद उस महल में रह चूका हूँ तो  मुझे ये सब पता नहीं होगा क्या ? अगर आपको दूध का दूध और पानी का पानी करना हो तो आप उन सुरंगो में अपने सैनिकों को भेजकर देखें। राजा सुदीर ने तुरंत अपने सैनिकों को सुरंग की दिशा में भेजा।  उसके सैनिकों ने वहां पर थोड़ी छानबीन की तभी उन्हें एक गुफा मिली।  वह सभी गुफा के अंदर गए।  कुछ ही पलों बाद उन्हें कुछ लाशें मिली और उनके हाथ में खुदाई करने का सारा सामान था। 

खुदाई करने वाले लोगो की सुरंग में मिली लाशें

सभी सैनिक तुरंत राजा सुदीर के पास आते है  और उन्हें बताते है की हमें कुछ खुदाई करने वाले लोगों की लाशें मिली जिनके हाथ में खुदाई का सामान था। यह सुनकर राजा सुदीर को हाचि पर धीरे धीरे भरोसा होने लगा। 

तभी वहां पर जादूगर अकरम आता है।  राजा सुदीर जादूगर अकरम को देखकर बहुत खुश होते है और दोनों एक दूसरे के गले मिलते है। तभी राजा सुदीर देखते है कि जादूगर अकरम के साथ एक हाथी का बच्चा भी आया है। राजा सुदीर पूछते है की ये हाथी का बच्चा तुम्हारे साथ यहां पर क्या कर रहा है ? जादूगर अकरम तुरंत जवाब देता है की ये मेरा पालतू जादुई हाथी है, ये कुछ भी कर सकता है।  राजा सुदीर जादूगर अकरम को कहता है कि ध्यान से सुनो हमारे पास बस एक रात है, अगले दिन ही हमें इस गुप्त जगह से निकल कर उग्रराज के महल में जाना है।राजा सुदीर कहते है की मै एक निजी जादुई सैनिक जिसका नाम हाचि है उसको अपने साथ रखूँगा जो हमें एक सुरक्षित रास्ता बताएगा।  हमारे बाकी के सैनिक पूरे महल के अंदर अलग अलग जगहों पर छुप जाएंगे। अब बस हमें अच्छे से काम करना है। यह कहने के बाद सभी लोग सो जाते है और वह रात भी बीत जाती है। 

अगले और अंतिम भाग में पढ़िए – जादूगर अकरम और अंतरिक्ष के रखवालो के बीच घमासान लढाई

 

राजा सुदीर की साहस कथा -(Part 7 of 9)

जादुई दुनिया में जादूगर अकरम

यह कहानी का सातवां भाग है। इस कहानी को मैंने 9 भागों में बाँटा  है। मुझे इन 9 शब्दों (राजा, शैतान, सेना, प्रजा, हाथी, घोडा, भाला, झंडा, लड़ाई) से  कहानी बनाने का  टास्क मिला था । जिस  कहानी को  मुझे दो पन्नों में लिखना था वह 2 , 3 , 4 , 5 . . . .   करते करते रजिस्टर के 30 पन्नों की बन गयी।  यह 30 पन्ने अचानक नहीं लिखे गये क्योंकि कई बार बिच बिच  में मैंने इस कहानी को लिखना छोड़ दिया था , फिर वह गैप कभी कभी एक दो महीनों की भी हो जाती थी ।  मै  लिखता गया , लिखता गया , लिखता ही गया ……..   और इसी लिखने के सफ़र में एक साल कैसे निकल गया मुझे पता ही नहीं चला।  ऐसे करते करते आख़िरकार इस कहानी को मैंने अंतिम मुक़ाम तक पहुंचा ही दिया। इस कहानी के चित्र मैंने और मेरी मम्मी ने बनाये , जिसे करीबन दो महीने लगे थे। आशा करता हूँ की आप इस कहानी के सारे भाग पढ़ेंगे और इसका लुफ़्त भी उठाएंगे। आपके सुझाव मुझे भविष्य में और बेहतर लिखने के लिए प्रेरणा देंगे।

आरव राउत

जादुई दुनिया में जादूगर अकरम

फिर जादूगर अकरम पूरी जादुई दुनिया घूमने जाता है।  जादूगर अकरम को कुछ जादुई शिष्य दिखते है जो उसे कहते है की इधर तुम जितना भी वक्त रहोगे, लेकिन एक दिन से ज्यादा नहीं रह पाओगे क्योंकि जादुई दुनिया में वक्त बहुत धीरे चलता है।  जादूगर अकरम वहा से थोड़ा दूर चला आता है लेकिन तभी उसके सामने दो जादुई शिष्य एक बार और आते है और कहते है की हम  यहां पर अभी अभी आए है हमें आपसे दोस्ती करनी है क्योंकी आप भी यहाँ पर अभी अभी आए है।  जादूगर अकरम दोनों  के साथ वहा पर बहुत अच्छे से रहता है और बहुत कुछ नया सिखता है।  अगले दिन जादूगर अपने टाइम टेबल पे देखता है की उसपे क्या आया है तो उसने देखा की उसे जादूई  गुरु के पास “जादुई शुरिकेन” जो सभी जादूगरों का सबसे ताकतवर हथियार है उसे कैसे चलाते है और उससे कैसे बचते है ये सीखने के लिए जाना है। फिर जादूगर अकरम उन दोनों जादुई शिष्य को बताता है की हमें कोई चीज सीखने के लिए जादुई गुरु  के पास जाना है।  यह सुनते ही वह दोनों झट से तैयार हो कर जादूगर अकरम के साथ जादुई गुरु  के पास जाते  है।  वहा पर बहुत सारे जादुई शुरिकेन रखे हुए थे जिसे जादूगर हाथ लगाकर देखता है तभी उसको एक जोर का झटका लगता है और वो बेहोश हो जाता है।

खतरनाक हथियार शुरीकेन

थोड़ी देर के बाद वो होश में आ जाता है। उसे पानी पिलाया जाता है। थोड़ी दुरी पर एक उग्रदेश का जासूस रहता है  जीसने जादूगर अकरम को पहचान लिया था की ये राजा सुदीर के राज्य का जादूगर है और यही जादूगर राजा सुदीर को गोटासुर को छुड़ाने में मदत करने वाला है, तो उसने सोचा की अगर मै उग्रराज को ये खबर दूंगा की जादूगर अकरम मर गया है तो उग्रराज मुझे बहुत बडा इनाम देगा और झूट पकड़े जाने से पहले मै उग्रदेश को छोड़कर किसी दूसरे राज्य में चला जाऊंगा और अमीरो की तरह रहुंगा।  यह सोचते हुए की इनाम में क्या मिलेगा वह जासूस उग्रराज को ये खबर देने चला और उसने ये खबर उग्रराज को बता भी दी।  ये खबर सुनते ही उग्रराज ख़ुशी से पागल हो गया और इस ख़ुशी में अनजाने में उग्रराज ने उस जासूस को उसके दादा जी ने दिया हुआ एक हीरो से लदा हुआ बेशक़ीमती हार दे दिया। ज्यादा ख़ुश न होकर वह जासूस कीमती हार और अपने परिवार को लेकर चुपके से उग्रदेशसे रफूचक्कर हो जाता है। उसके जाने के चंद पलों बाद ही उग्रराज ऐलान कर देता है कि जादूगर अकरम मर गया है। ये सब बाते राजा सुदीर के जासूसों ने सुन ली और तुरंत राजा सुदीर को बता दिया की जादूगर अकरम मर गया है। उधर उग्रराज मन ही मन खुश होते हुए सोचता है की ये खबर राजा सुदीर को जब पता चलेगी तो वो फुट फुट कर रोएगा और गोटासुर को छुड़ाने का विचार मन से निकाल देगा। क्योकि एक तरह से उसका एक हाथ ही मर गया है। बस एक ही आदमी को इस पड़दे के पीछे की सच्चाई पता थी की जादूगर अभी जिन्दा है वो था उस जासूस का दोस्त।  उसने अच्छाई दिखाते हुए राजा सुदीर को बता दिया की जादूगर अकरम अभी जिन्दा है बस उग्रदेश के जासूस ने उग्रराज से झूठ बोला था।  इस बात से राजा सुदीर के जान में जान आती है।

जादुई दुनिया में जादूगर अकरम का प्रशिक्षण जारी था।  जहा किसी दिन जादूगर अकरम को उस जादुई शुरिकेन को हाथ लगाने से एक जोर का झटका लगता था अभी वो उसको हाथ में लेकर उससे निशाना लगाके मारना,  यहाँ तक की उस हथियार से बचना भी आ गया था और अगर उसे वो हथियार गलती से भी लगा तो उसे कुछ नहीं होता। जादुई गुरु  के पास आकर उसको एक और नया जादू सीखने को मिला, जो था – एक बिजली के गोले से किसी को भी मार सकना।  

अगले दिन जब जादूगर अकरम अपने दोस्तों के साथ जादुई गुरु  के पास गया तब उसने देखा की वहां पर बहुत सारे अलग अलग प्रकार के जानवर थे। जैसे हाथी, शेर, सांप, मैना, पफर फिश और बहुत सारे। जादुई गुरु  ने जादूगर अकरम को कहा की अगर तुम्हे सबसे अच्छा और ताकतवर जादूगर बनना है  तो तुम्हे एक जानवर पालना ही होगा जो खुद भी जादुई हो, इससे तुम्हें दुश्मनों को हराने में मदद मिलेगी।  अब तुम इनमे से अपनी मर्जी से कोई भी जादुई जानवर चुन सकते हो।  जादूगर अकरम सोचता है की उसके  लिए हाथी ही ठीक रहेगा। वो जादुई  गुरु को कहता है की उसे जादुई हाथी चाहिए।

जादुई हाथी

जादुई गुरु  वो हाथी देते हुए कहते है की अब इस हाथी के खाने पीने की जिम्मेदारियों से लेकर उसके प्रशिक्षण की जिम्मेदारी तुम्हारी है।  जादूगर अकरम ने जो हाथी लिया था वो एक बच्चा था और बहुत सुन्दर भी था।  उस हाथी को अभी उड़ना नहीं आता था क्यों की वो इस काम के लिए बहुत छोटा था। इसलिए जादूगर  अकरम उसे अपने जादू से उठाकर अपने घर ले आता है और अपने घर के बाजु में ही जादूगर अकरम अपने हाथी के लिए एक घर बनाता है।  फिर जादूगर अकरम जादुई दुनिया में अपने जादू से हाथी के घर के आस पास एक गन्ने का खेत उगाता है और कुछ गन्ने तोड़कर उस हाथी के घर में रखता है और उस हाथी को उसके नए घर में ले जाता है और खाना खिलाता है।  जादूगर अकरम सोचता है  कि कल से इस हाथी का प्रशिक्षण शुरू करना होगा।  अगले दिन जब वह हाथी के घर में देखता है तो वहा पर हाथी नहीं होता है,  जादूगर अकरम उस हाथी को हर संभव जगह पर देखता है लेकिन उसे वह हाथी नहीं मिलता।   जब वह ऊपर की तरफ देखता है तो उसे वह हाथी उसके ठीक ऊपर उड़ रहा दिखता है।   वह अपने दोस्तों से पूंछता है की ये हाथी उड़ने कैसे लगा ?  तो वे कहते है उन्होंने इसे उड़ना सिखाया है।  तभी वो हाथी नीचे आता है और जादूगर अकरम के पास जाता है।  अब जादूगर उस हाथी को सब कुछ सीखाने लगता है।  

अगले दिन जादूगर अकरम अपने दोस्तों के साथ जादुई गुरु  के पास जाता है क्योंकि जादूगर अकरम को पता था की आज जादुई गुरु  उसे कुछ नया और अनोखा जादू सीखाने वाले है।  जब वो लोग वहा पहुंचते  है तब वहां पर कोई  नहीं होता है, तभी अचानक जादूगर अकरम हवा में एक शुरीकेन  देखता है और कुछ ही पलो में वह शुरीकेन  जादूगर अकरम  की तरफ तेजी से आता है लेकिन जादूगर  अकरम उस  शुरीकेन को बहुत ही सफाई से पकड़ लेता है और जहासे वो शुरीकेन आया है वहा पे तेजी से मारता है,  पर उस शुरीकेन के हवा में ही तुकडे तुकडे हो जाते है।  उसी वक़्त, जहां जादूगर अकरम  वो शुरीकेन फेंकता है  वही पर जादुई गुरु  प्रकट होते है।  जादूगर अकरम पूछता है की ये आपने कैसे किया ?  जादुई गुरु  कहते है  तुम जो अभी यहाँ पर सीखने आए हो ये वही है।  जादूगर अकरम कहता है कि इससे शुरिकेन जो सबसे ताकतवर हथियार है,  वो भी पलक झपकते ही  चूर चूर हो गया है।  जादूगर अकरम यह जादू जल्दी ही सीख जाता है।  

जादूगर अकरम

उसके बाद वो अपने हाथी को सीखाने लगता है और  कुछ देर के बाद वह हाथी कुछ ऐसा जादू सीख जाता है जिससे वह बहुत बड़ा और बहुत छोटा हो सकता है।  सुबह सुबह जब जादूगर अकरम टाइम टेबल देखता है उसमें होता है “तुम्हे जादुई  गुरु ने अभी बुलाया है”  तो जादूगर अकरम बिना देरी किये जादुई गुरु  के पास जाता है।  जादुई  गुरु कहते है की अब तुम्हें इन डिब्बियों की कोई जरूरत नहीं है क्योंकी आज तुम उड़ना,  पानी के अंदर तैरणा और फिरसे जमीन पे आना इन सबका नया जादू सीखने वाले हो।  जादूगर अकरम वह जादू जल्दी ही सिख जाता है। अब वो अपने मन से बिना डिब्बियों से उड़ सकता है, पानी के अंदर तैर सकता है और जमीन पे वापस भी आ सकता है।  अगले दिन उसके टाइम टेबल पर एक चीज लिख के आती है की –

“आज तुम्हे एक खास जादू सिखाया जाने वाला है और इसके बाद तुम्हारी एक परीक्षा होने वाली है।”

जादूगर अकरम वह पढ़कर जादुई गुरु  के पास जाता है।  जादुई गुरु उसे कहते है की आज मै तुम्हे टेलीपोर्ट होने का जादू सीखाने वाला हु।  कुछ ही देर में जादूगर वो जादू सीख लेता है तभी जादुई गुरु कहता है की अब तुम्हारी परीक्षा लेने का समय आ गया है।

अगले भाग में पढ़िए – किबा टीबा का नाटक

राजा सुदीर की साहस कथा -(Part 6 of 9)

ख़ुशी में भी एक गम

यह कहानी का छठवां भाग है। इस कहानी को मैंने 9 भागों में बाँटा  है। मुझे इन 9 शब्दों (राजा, शैतान, सेना, प्रजा, हाथी, घोडा, भाला, झंडा, लड़ाई) से  कहानी बनाने का  टास्क मिला था । जिस  कहानी को  मुझे दो पन्नों में लिखना था वह 2 , 3 , 4 , 5 . . . .   करते करते रजिस्टर के 30 पन्नों की बन गयी।  यह 30 पन्ने अचानक नहीं लिखे गये क्योंकि कई बार बिच बिच  में मैंने इस कहानी को लिखना छोड़ दिया था , फिर वह गैप कभी कभी एक दो महीनों की भी हो जाती थी ।  मै  लिखता गया , लिखता गया , लिखता ही गया ……..   और इसी लिखने के सफ़र में एक साल कैसे निकल गया मुझे पता ही नहीं चला।  ऐसे करते करते आख़िरकार इस कहानी को मैंने अंतिम मुक़ाम तक पहुंचा ही दिया। इस कहानी के चित्र मैंने और मेरी मम्मी ने बनाये , जिसे करीबन दो महीने लगे थे। आशा करता हूँ की आप इस कहानी के सारे भाग पढ़ेंगे और इसका लुफ़्त भी उठाएंगे। आपके सुझाव मुझे भविष्य में और बेहतर लिखने के लिए प्रेरणा देंगे।  

आरव राउत

तभी राजा सुदीर सैनिकों से कहता है की तेज़ रफ़्तार से गढ्ढा खोदने वाले आदमियों को बुलाओ और उनसे कहो की उग्रराज के कमरे से लेकर उसके महल के बीच तक एक सुरंग खोदे और किसी को भी इस बात की जरा भी भनक ना लगे।  राजा सुदीर कहते है  की हमारे पास सिर्फ १ दिन ही है। थोड़ी देर बाद रात होती है,  सुरंग खोदने वाले आते है, तेज़ रफ़्तार से  सुरंग खोदना शुरू करते है।

राजा सुदीर उग्रराज के महल का नक्शा उन पांचों जादुई सैनिकों से हासिल करता है।  उस नक़्शे में उग्रराज के महल की सारी जानकारी है  की कहा जादुई जाल है, कहा उग्रराज का कमरा है,  कहा प्रवेश द्वार है,  यह सब उस नक़्शे मे है । 

राजा सुदीर जादुई जाल का पता चलने से बहुत खुश हुए क्यों की यही एक चीज थी जो उग्रराज के महल में जाने से रोक रही थी लेकिन उस ख़ुशी में भी एक गम  था उनको बस जादुई जाल कहा पर है ये पता था, पर ये नहीं पता था की वो जाल कितने खतरनाक थे।   जब राजा सुदीर ने पहली बार उग्रराज के महल का नक्शा देखा तो उसे झटका सा लगा क्योंकि वह जादुई जाल एक नहीं था दो नहीं थे बल्कि कदम कदम पे एक जादुई जाल था जो सिर्फ उग्रराज और उसके सैनिकों पर असर नहीं करता था। 

राजा सुदीर कुछ बोलने ही वाले थे की तभी उसका एक जासूस जादुई सैनिकों के घर के बाहर दौड़ते हुए आता है हालांकि उसे कोई घर नहीं दिख रहा था लेकिन वह  धीमी आवाज में राजा सुदीर,  राजा सुदीर,  अंदर ले लो मुझे आपको एक खास जानकारी बतानी है।  राजा सुदीर उस जासूस की आवाज़ सुन लेते है और झट से घर के अंदर ले लेते है और पूछते है की कैसी जानकारी है ? वह जासूस बोलता है की अगर आप गोटासुर के १ मिल की दुरी पर ना रहकर उसके अंदर एक कदम भी आगे बढ़ाया तो  गोटासुर को बचाने के लिए उग्रराज  गोटासुर के पास प्रकट हो जाएगा वो भी अपने आप।   पर इसके लिए उग्रराज को महल के अंदर रहना पड़ेगा।  यह बात सुनकर राजा सुदीर ने अब ठान ली की अब हम सब महल में एक दिन के बाद ही जाएंगे।  उस जासूस ने एक और बात बताई,  उस जमीन पर जो दूर अंतरिक्ष में है वहा पर  गोटासुर को संभालने के लिए  दुनिया के २० सबसे ताकतवर जादूगर हर वक्त  गोटासुर की सुरक्षा के लिए तैनात रहते है, वे उस जमीन पर कही भी छुप  सकते है। यह ख़ुफ़िया जानकारी देकर जासूस अपने काम के लिए निकल जाता है।  

राजा सुदीर

राजा सुदीर को यह ख़ुफ़िया जानकारी सुनकर थोड़ा झटका लगा क्योंकी वहां पर बहुत ताकतवर जादूगर है।  राजा सुदीर ने सोचा क्यों न जादूगर अकरम को उस जमीन पर ले जाए ?  लेकिन तभी राजा सुदीर के मन में एक सवाल आता है की अगर वह जादूगर अकरम को उस जमीन पर ले भी जाते है, तो वो उन ताकतवर जादूगरों से कैसे लड़ेगा।   इस समस्या का हल निकालने के लिए राजा सुदीर महाराज सूर्यकान्त को बुलाते है और पूछते है की उग्रदेश के पास में कोई जादुई गुरु  है क्या ?  महाराज सूर्यकान्त कहते है की हाँ। वह गुरु उग्रदेश के पास वाले जंगल में रहते है और उनकी एक खासियत है की वो अपने हर शिष्य को बस एक दिन में ही दुनिया का सबसे ताकतवर जादूगर बना देते है। यह सुनकर राजा सुदीर को बहुत ख़ुशी होती है और वो जादुई सैनिको को यह आदेश देते है की जादूगर अकरम को खबर कर दो की वो अभी इसी वक्त जादुई गुरु  के पास चला जाए और उधर से सीधा मेरे पास आए । जादूगर अकरम  के पास ये खबर आते ही वह झट से अपना सामान बांध के उग्रदेश के पास वाले घने जंगल में निकल पड़ता है जहाँ पर वह जादुई गुरु  रहते है, कुछ समय बाद वहापर पहुंच जाता है।  जादूगर अकरम  वहा पर जादुई गुरु  को ढूंढता है पर उसे जादुई गुरु  कहीं नहीं मिलते और वह एकदम से बेहोश हो जाता।

बेहोश जादूगर अकरम

बेहोशी में जादूगर अकरम के पैरो पर कुछ अनजान आदमियों ने एक डिब्बी में से पानी की बुँदे डाली जो एक हार से जुडी हुई थी और वह हार उसके गले में डाल दिया जिसके कारन जादूगर अकरम उड़ने लगता है। जब जादूगर अकरम को होश आता है तब वह खुदको जमीन से एक किलोमीटर ऊपर हवा में उड़ते हुए देखता है,  जादूगर अकरम एकदम डर जाता है लेकिन जब थोड़ी देर बाद वह गिरता नहीं तो उसके जान में जान आती है।  जादूगर अकरम को वहां पर बहुत सारे जादुई शिष्य दिखते है । वहां पर राजा सुदीर रात के समय में आसमान में वो जमीन ढूंढ रहे थे। वह सोच रहे थे की एक दिन तक हमें तैयार हो जाना चाहिए।  जादुई दुनिया में  जादूगर अकरम अपने पुरे शरीर का निरीक्षण करता है, देखता है की क्या  उसके शरीर पर कोई बदलाव तो नहीं हुआ है।  उसे आश्चर्य होता है जब वह खुद के गले पर एक हार बंधा देखता है जिसपर  तीन छोटी छोटी डिब्बिया है।

तीन छोटी छोटी डिब्बिया

जादूगर अकरम जादुई  गुरु को ढूंढने लगता है  जब उसे जादुई गुरु  दूर से दिख जाते है  तो वो तेजी से हवा में उड़कर उनके पास चला जाता है।  हवा में उड़ते वक्त वह महसूस करता है की जमीन पर भागने से दस गुना ज्यादा तेज हवा में भाग सकता है।  उसे इस बात से बहुत ख़ुशी होती है। जब जादूगर अकरम  जादुई गुरु तक पहुंच जाता है तब जादुई  गुरु उसे ये कहते है की ये बात कभी मत भूलना की तुम्हारे गले में जो हार है उसे तुम कभी मत निकालना क्योंकि ये हार तुम्हें  हर खतरे से बचाता  रहेगा और ये डिब्बिया तुम्हारी बहुत मदद करेगी। पहिली डिब्बी पर तुम्हे आसमान का चित्र दिखेगा, जब तुम इस डिब्बी में से एक बून्द अपने पैरो पर डालोगे तो तुम एक किलोमीटर ऊपर उड़ जाओगे, तुम चाहो तो कितने भी बुँदे डाल सकते हो लेकिन तुम उतने किलोमीटर ऊपर उड़ जाओगे। दूसरी डिब्बी में तुम्हे समुद्र का चित्र दिखेगा, अगर तुम्हें समंदर के एक मीटर नीचे जाना है तो तुम इस डिब्बी में से एक बूंद अपने पैरो पर डाल देना, तुम समंदर के एक मीटर नीचे पहुँच जाओगे।  तुम जितनी भी बुँदे इस डिब्बी से डालोगे उतने ही मीटर तुम समंदर के नीचे चले जाओगे। तभी जादूगर अकरम जादुई गुरु  से पूछता है की अगर मुझे फिरसे जमीन पर खड़ा होना हो तो मै क्या करू?  जादुई गुरु  कहते है – शिष्य अभी मेरी बात पूरी नहीं हुई है, मै यही बता रहा था की  तुम्हें जब भी आसमान से नीचे आना हो या समंदर से ऊपर जाना हो,  तो तुम जितने भी किलोमीटर ऊपर हो या समंदर से नीचे हो  तुम्हे उतनी  ही बुँदे तीसरी डिब्बी से अपने पैरो पर डालना है।  हवा में उड़ते उड़ते या समंदर में तैरते तैरते कभी घबराना नहीं क्यों की तुम्हे साँस लेने में कोई तकलीफ नहीं होगी,  जादुई गुरु  उसे एक जादुई कागज भी देते है जिसमे रोज का टाइम टेबल अपने आप सुबह ६ बजे से दिखना शुरू हो जाता है।

 अगले भाग में पढ़िए – जादुई दुनिया में जादूगर अकरम

राजा सुदीर की साहस कथा -(Part 5 of 9)

गोटासुर आखिर है कहा ?

यह कहानी का पाँचवा भाग है। इस कहानी को मैंने 9 भागों में बाँटा  है। मुझे इन 9 शब्दों (राजा, शैतान, सेना, प्रजा, हाथी, घोडा, भाला, झंडा, लड़ाई) से  कहानी बनाने का  टास्क मिला था । जिस  कहानी को  मुझे दो पन्नों में लिखना था वह 2 , 3 , 4 , 5 . . . .   करते करते रजिस्टर के 30 पन्नों की बन गयी।  यह 30 पन्ने अचानक नहीं लिखे गये क्योंकि कई बार बिच बिच  में मैंने इस कहानी को लिखना छोड़ दिया था , फिर वह गैप कभी कभी एक दो महीनों की भी हो जाती थी ।  मै  लिखता गया , लिखता गया , लिखता ही गया ……..   और इसी लिखने के सफ़र में एक साल कैसे निकल गया मुझे पता ही नहीं चला।  ऐसे करते करते आख़िरकार इस कहानी को मैंने अंतिम मुक़ाम तक पहुंचा ही दिया। इस कहानी के चित्र मैंने और मेरी मम्मी ने बनाये , जिसे करीबन दो महीने लगे थे। आशा करता हूँ की आप इस कहानी के सारे भाग पढ़ेंगे और इसका लुफ़्त भी उठाएंगे। आपके सुझाव मुझे भविष्य में और बेहतर लिखने के लिए प्रेरणा देंगे।  

आरव राउत 

शुरू में जासूस  किसी को पहचान नहीं पाते है लेकिन असली रूप में आने के बाद तुरंत पहचान लेते है। तभी जासूस  राजा सुदीर को कहते है की ये जगह आपके लिए सुरक्षित नहीं है इसलिए हम अमजु जिसने आपको बहुत  सारी जादुई मुद्राए दी थी और जो उग्रदेश का सबसे अमीर आदमी है उसके पास एक नौकर भिजवाते है, और उससे कहलाते है की राजा सुदीर आपके पास आने वाले है।  जब अमजू ने यह बात सुन ली तो उसने अपने घर में कड़ी सुरक्षा रखवा ली।  कुछ देर तक अमजु दरवाजे पर खड़े होके राजा सुदीर का इंतजार करने लगता है। उसी वक्त महाराज सूर्यकान्त बूढ़े आदमी के वेष में और राजा सुदीर थैले के वेष में अमजु के पास आते है,  अमजु उन दोनों को हकालने ही वाला था की तभी महाराज  सूर्यकान्त बोलते है की मै राजा सुदीर का ससुर हूँ। महाराज सूर्यकान्त की आवाज सुनकर अमजु अपने आप को दोषी समझता है की क्यों वह उन दोनों को पहचान नहीं पाया, बिना समय गवाए वह उन दोनों को घर के अंदर लेता है। उन दोनों से कहता है आप  ऐसे वेश में आओ ताकि भविष्य में  मुझसे ऐसी भूल ना हो।  फिर वो दोनों अपना वेश बदलते है और अमीर जासूस के सौ जादुई मुद्रा वापस कर देते है। तभी अमजु बोलता है कि नहीं मुझे इसकी जरूरत नहीं है , हालांकि  आपको इसकी जरुरत आगे कभी भी हो सकती है।  अब उनको यहां पर कोई खतरा नहीं था। अमजु राजा सुदीर और महाराज सूर्यकांत से उस भूल के लिए माफ़ी मांगता है और उनको सभी अमीर लोगों की रहने की जगह बता देता है। 

अमजू और दोनों राजाओं की मीटिंग

वह कहता है की

मुझे अभी अभी एक नयी और बेहद काम की खबर मिली है,  आपको तो पता ही होगा की उग्रराज तीन दिन बाद अपनी प्रजा को देखने उग्रदेश के मुख्य शहर में जाने वाला है लेकिन महल के एकदम पास एक घर है जो किसी को नहीं पता सिवाय आपके उन पांचो जादुई सैनिकों के। आपको कोई इस घर के बाहर देख ना सके इसलिए मै सभी अमीर आदमियों को ये बोलता हु की तीन दिन बाद कोई भी अपने घर से बाहर न निकले । 

अमजु

अब तुम दोनों मेरे बड़े से घर में कहीं भी घूम सकते हो। तभी राजा सुदीर ने अमजु से पूछा कि – क्या तुम यहाँ पर मेरे पांच जादुई वफादार सैनिकों को बुला सकते हो? अमजु ने कहा कि हाँ , जरूर। 

फिर उन जादुई सैनिकों को बुलाया गया और राजा सुदीर के पास भेज दिया। वहां पर राजा सुदीर और महाराज सूर्यकांत बैठे थे। राजा सुदीर ने उनको पूछा की महल के पास तुम्हारा कोई घर है वो भी सुरक्षित ? उन्होंने कहा हां वो घर आज तक का सबसे सुरक्षित घर होगा। राजा सुदीर ने एक और प्रश्न पूछा कि वहां पर हम दोनों की रहने की जगह है ? उन्होंने कहा हाँ। तभी वहा पर राजा सुदीर के पचास वफ़ादार सैनिक आ जाते है। राजा सुदीर ने एक और प्रश्न पूछा की – क्या वहां पर इन दस लोगों के लिए भी रहने की व्यवस्था होगी ? उन्होंने फिर से हाँ कहा। राजा सुदीर ने महाराज सूर्यकान्त को बताया की हम वैसे ही उस सुरक्षित घर तक जा सकते है जैसे हम लोग यहाँ तक आये है और बाकी के सैनिक हमें सुरक्षित रखेंगे। महाराज सूर्यकान्त को ये बात पसंद आई और उन्होंने  ये तय भी कर दिया की हम ऐसे ही  सुरक्षित घर में जाएंगे।  तय होने के बाद राजा सुदीर ने उसके चालीस सैनिकों को बताया की तुम सब महल के चारो तरफ़  फ़ैल जाओ,  १७ लोग अमजु के घर एक दिन के लिए रुक जाते है।  अगले  दिन के सूरज की पहली किरण के साथ  फिर वो अमजु के घर से निकल पड़ते है और भीड़ में ग़ायब हो जाते है। उस रात को हुई बात के मुताबिक जादुई सैनिकों के एकदम सुरक्षित घर में चले जाते है।  वहा पर वो जादुई सैनिक राजा सुदीर को एक बेहद खास जानकारी देते है।

जादुई सैनिक बताता है की गोटासुर महल के ठीक ऊपर अंतरिक्ष में बहुत दूर एक तैरती हुई जमीन पर है इसलिए वह जमीन हमें नहीं दिखेगी, तभी राजा सुदीर ने एक सवाल पूछा की हम वहां तक कैसे जा सकते है ? वह पांचो एक साथ जवाब देते है – एक सटीक गेंद जैसी आकृति चाहिए और उसे महल के बीचों बीच एक जगह है वहां पर रख के उस जमीन के बारे में सोचा गया तो हम वहां तक पहुंच सकते  है।

एक सटीक गेंद जैसी आकृति

राजा सुदीर ने फिर से एक सवाल पूछा की वह चीज कहां पर है ? सभी ने एक ही उत्तर दिया,  उग्रराज  के कमरे में।  यह सुनकर राजा सुदीर को जरा खुशी हुई और कहा की अगर हम वहाँ पर पहुँच गए तो आगे क्या होगा ? आगे हमें पता नहीं लेकिन उग्रराज ने हम जादुई सैनिको को ये बताया था की उस जमीन पर दुनिया के बहुत सारे ताकतवर जादूगर है। राजा सुदीर ने कहा की अगर वह गेंद जैसी दिखने वाली आकृति उग्रराज के कमरे में है तो चोरी करने के अलावा हमारे पास दूसरा रास्ता नहीं होगा।  जादुई सैनिको ने भी कहा की चोरी करने के अलावा हमारे पास और कोई रास्ता नहीं है। हमें चोरी उग्रराज के जाने  के बाद करनी  पड़ेगी और २४ घंटे में  उस जमीन पर पहुंचना होगा क्योकि उग्रराज २४ घंटो के अंदर अपने महल वापस आने वाला है।

अगले भाग में पढ़िए – ख़ुशी में भी एक गम

राजा सुदीर की साहस कथा -(Part 4 of 9)

“चकमक चकमक ची ची चू चू, बदल जाए यह मेरा मुँह”

यह कहानी का चौथा भाग है। इस कहानी को मैंने 9 भागों में बाँटा  है। मुझे इन 9 शब्दों (राजा, शैतान, सेना, प्रजा, हाथी, घोडा, भाला, झंडा, लड़ाई) से  कहानी बनाने का  टास्क मिला था । जिस  कहानी को  मुझे दो पन्नों में लिखना था वह 2 , 3 , 4 , 5 . . . .   करते करते रजिस्टर के 30 पन्नों की बन गयी।  यह 30 पन्ने अचानक नहीं लिखे गये क्योंकि कई बार बिच बिच  में मैंने इस कहानी को लिखना छोड़ दिया था , फिर वह गैप कभी कभी एक दो महीनों की भी हो जाती थी ।  मै  लिखता गया , लिखता गया , लिखता ही गया ……..   और इसी लिखने के सफ़र में एक साल कैसे निकल गया मुझे पता ही नहीं चला।  ऐसे करते करते आख़िरकार इस कहानी को मैंने अंतिम मुक़ाम तक पहुंचा ही दिया। इस कहानी के चित्र मैंने और मेरी मम्मी ने बनाये , जिसे करीबन दो महीने लगे थे। आशा करता हूँ की आप इस कहानी के सारे भाग पढ़ेंगे और इसका लुफ़्त भी उठाएंगे। आपके सुझाव मुझे भविष्य में और बेहतर लिखने के लिए प्रेरणा देंगे।

आरव राउत

आम जादुई आदमी को उग्रराज सहज अपने राज्य के सिमा के अंदर जाने देगा इसलिए पहले हमें आम जादुई आदमी के जादू, जादूगर अकरम से सीखना होगा। तुममे से कोई जादूगर अकरम को बुलाओ और कोई महल के नीचे सुरंग में से हमारे सबसे ताकतवर हथियार लाओ फिर मै आगे की योजना बताऊंगा।

तभी वहां पर महाराज सूर्यकान्त जी आते है और राजा सुदीर ने महाराज सूर्यकान्त जी को वहाँ तक योजना बताई जहां तक वफादारों को बताई थी और ये भी कहा कि कुछ देर में जादूगर अकरम और हमारे ताकतवर हथियार लाए जाएंगे।

राजा सुदीर और सूर्यकान्त जी की मीटिंग

ये कहते ही जादूगर अकरम आ गया फिर राजा सुदीर ने जादूगर से  कहा कि तुम हमारे सैनिकों को आम जादुई आदमी के जादू सिखाओ और मुझे कुछ जादुई चीजे दो जो उग्रदेश में कोई खरीद पायेगा तो जादूगरने हाँ कहा और सबको जादू सीखा दिया और राजा सुदीर ने जो चीजे माँगी थी वो भी दे दी। राजा सुदीर का काम हो गया था बस उनको सबके लिए एक जादुई मुद्रा चाहिए थी ताकि उनके पास एक असली जादुई आदमी की पहचान आए।  राजा सुदीर उग्रदेश में ५० सैनिक ले जाने वाला था। उसने एक सैनिक को बुलाया और कहा की उग्रदेश के सभी जासूसों को बता दो की हमें ५१ मुद्रा चाहिए, तभी उस सैनिक ने एक सवाल पूछा की हम तो ५२ लोग रहेंगे तो ५१ जादुई मुद्रा क्यों ? तभी राजा सुदीर बोले की आगे तुम्हे पता चल जाएगा। फिर वह सैनिक एक जासूस के पास जाता है और कहता है की राजा सुदीर को ५१ जादुई मुद्रा चाहिए। यह सुनने के बाद वह जासूस  सीधे उग्रदेश के सबसे अमीर जासूस जिसका नाम अमजु है उसके पास एक खत लिखता है की राजा सुदीर को ५१ जादुई मुद्रा चाहिए। तो उस अमजु ने उसके उत्तर में लिखा की “राजा सुदीर आपको बस ५१ ही जादुई  मुद्रा चाहिए मै आपको सौ दे देता हु क्यों की मेरे पास तो हजारो जादुई मुद्राए है, अगर बाद में काम पड़े तो उनमे से ले लेना”। खत के साथ साथ अमजु १०० जादुई मुद्रा भी भेज देता है।  वो १०० जादुई मुद्रा और खत राजा सुदीर के पास रात को पहुंचे। फिर राजा सुदीर ने सबको अपने कमरे में बुलाया और योजना सुनानी शुरू की। 

राजा सुदीर

राजा सुदीर कहते है की, अब सभी सैनिक जो यहाँ पर बैठे है वह बिना हिचकिचाते हुए उग्रदेश में घुस सकते है, क्योंकि अब सबके पास जादुई मुद्रा भी होंगी और सब जादू भी सीखे होंगे लेकिन वहा पर मै नहीं जा पाऊँगा क्योंकि उग्रदेश के सभी लोग मुझे अच्छी तरह से पहचानते है।  इसके लिए मेरे पास एक लाजवाब हल है। मै हर वक्त महाराज सूर्यकान्त के पिट पीछे जादुई चादर  को ओढ़के  घूमूँगा ताकि गलती से भी किसी जादुई सैनिक ने या अमीर  लोगोने देख लिया तो उनको मै महाराज सूर्यकान्त जी ने लटकाया हुआ एक थैला दिखूंगा और आम जादुई लोगो को तो मै वैसे भी नहीं दिखूंगा। राजा सुदीर ने ये भी कहा की अब हमारे पास सिर्फ चार दिन ही बचे है। इसके तुरंत बाद राजा सुदीर महाराज सूर्यकान्त को लेकर जादूगर अकरम के पास जाते है और उससे कहते है की महाराज सूर्यकान्त को जादुई मंत्र बताओ जिससे इनका पूरा चेहरा बदल जाए और ये  एक बूढ़े आदमी  जैसे लगे,  मै ये इस लिए कह रहा हु क्योंकी उग्रराज सभी राजाओ को अच्छी तरह से पहचानता है।  जादूगर अकरम महाराज सूर्यकान्त जी को जादुई मंत्र बताता है

“चकमक चकमक ची ची चू चू, बदल जाए यह मेरा मुँह”

इसे कहने वाले का चेहरा पूरी तरह से बदल जाएगा।  तभी जादूगर अकरम राजा सुदीर से पूछता है क्या आपको इस मंत्र की जरूरत नहीं है? राजा सुदीर बोलते है, नहीं मुझे इसकी जरूरत नहीं है।  यह कहने के बाद राजा सुदीर और महाराज सूर्यकान्त  महल में जाकर सो जाते है। 

जादूगर अकरम

अगले दिन राजा सुदीर ने ५ जादुई सैनिकों को बुलाया जो राजा सुदीर के साथ थे लेकिन  इस योजना से अनजान थे, उन्हें कहा गया की वह दरबार के दरवाजे की रक्षा करे,  इस दरवाजे से आने वाले हर आदमी का चेहरा याद रखें, वह सभी ऐसा ही करते है। पहले उस दरवाजे से कुछ आम आदमी गुजरते है लेकिन बीच मे ही महाराज सूर्यकान्त जी इस मंत्र  का –

“चकमक चकमक ची ची चू चू, बदल जाए यह मेरा मुँह” 

उच्चारण करके बूढ़े आदमी में बदल जाते है, राजा सुदीर जादुई चादर  को अपने शरीर पर ओढ़कर महाराज सूर्यकांत के पिट पीछे  चलकर दरवाजे से अंदर आ जाते है।  बाद में जब उन  जादुई सैनिकों को पूछा जाता है की – कौन कौन से लोग उस दरवाजे से अभी गुजरे है ? तो उनके जवाब में  बूढ़े का भी नाम आता है  जिसने एक थैला लटकाया हुआ था।  इससे सभी को ये यकीन हो जाता है की जादुई सैनिको को जादुई चादर  ओढ़े हुए राजा सुदीर सच मे एक थैले जैसे दिखते है।  फिर महाराज सूर्यकांत उन पांचो जादुई सैनिको के सामने यह मंत्र कहते है –

चकमक चकमक ची ची चू चू, हो जाए पहले जैसा मुँह”

और यह कहते ही बूढ़े आदमी से वापस महाराज सूर्यकांत बन जाते है और राजा सुदीर थैले से राजा सुदीर बन जाते है।  यह सब देखकर पाँचो के पाँचो जादुई सैनिक चौंक जाते है तभी राजा सुदीर उनको बोलते है की जल्दी से उग्रदेश के मुख्यद्वार पर खड़े हो जाओ और वहा से दूसरे जादुई सैनिकों को हटवा दो ताकि हम किसी को भी ना दिखे ।  पांचों के पांचो जादुई सैनिकों को महाराज सूर्यकान्त जी का चेहरा  याद रखना होगा ताकि आगे जाकर कोई भूल न हो।  फिर पांचो जादुई सैनिक उग्रदेश के मुख्यद्वार पर खड़े हो जाते है।  राजा सुदीर, महाराज सूर्यकांत और बाकी के पचास लोग पूरी तैयारी करके, ५१  जादुई मुद्रा लेकर एक एक करके उग्रदेश के मुख्य द्वार से उग्रदेश के एक शहर से होते हुए जासूसों के एक छोटे से घर पर ठहर जाते है।

अगले भाग में पढ़िए – गोटासुर आखिर है कहा ?