राजा सुदीर की साहस कथा -(Part 6 of 9)

ख़ुशी में भी एक गम

यह कहानी का छठवां भाग है। इस कहानी को मैंने 9 भागों में बाँटा  है। मुझे इन 9 शब्दों (राजा, शैतान, सेना, प्रजा, हाथी, घोडा, भाला, झंडा, लड़ाई) से  कहानी बनाने का  टास्क मिला था । जिस  कहानी को  मुझे दो पन्नों में लिखना था वह 2 , 3 , 4 , 5 . . . .   करते करते रजिस्टर के 30 पन्नों की बन गयी।  यह 30 पन्ने अचानक नहीं लिखे गये क्योंकि कई बार बिच बिच  में मैंने इस कहानी को लिखना छोड़ दिया था , फिर वह गैप कभी कभी एक दो महीनों की भी हो जाती थी ।  मै  लिखता गया , लिखता गया , लिखता ही गया ……..   और इसी लिखने के सफ़र में एक साल कैसे निकल गया मुझे पता ही नहीं चला।  ऐसे करते करते आख़िरकार इस कहानी को मैंने अंतिम मुक़ाम तक पहुंचा ही दिया। इस कहानी के चित्र मैंने और मेरी मम्मी ने बनाये , जिसे करीबन दो महीने लगे थे। आशा करता हूँ की आप इस कहानी के सारे भाग पढ़ेंगे और इसका लुफ़्त भी उठाएंगे। आपके सुझाव मुझे भविष्य में और बेहतर लिखने के लिए प्रेरणा देंगे।  

आरव राउत

तभी राजा सुदीर सैनिकों से कहता है की तेज़ रफ़्तार से गढ्ढा खोदने वाले आदमियों को बुलाओ और उनसे कहो की उग्रराज के कमरे से लेकर उसके महल के बीच तक एक सुरंग खोदे और किसी को भी इस बात की जरा भी भनक ना लगे।  राजा सुदीर कहते है  की हमारे पास सिर्फ १ दिन ही है। थोड़ी देर बाद रात होती है,  सुरंग खोदने वाले आते है, तेज़ रफ़्तार से  सुरंग खोदना शुरू करते है।

राजा सुदीर उग्रराज के महल का नक्शा उन पांचों जादुई सैनिकों से हासिल करता है।  उस नक़्शे में उग्रराज के महल की सारी जानकारी है  की कहा जादुई जाल है, कहा उग्रराज का कमरा है,  कहा प्रवेश द्वार है,  यह सब उस नक़्शे मे है । 

राजा सुदीर जादुई जाल का पता चलने से बहुत खुश हुए क्यों की यही एक चीज थी जो उग्रराज के महल में जाने से रोक रही थी लेकिन उस ख़ुशी में भी एक गम  था उनको बस जादुई जाल कहा पर है ये पता था, पर ये नहीं पता था की वो जाल कितने खतरनाक थे।   जब राजा सुदीर ने पहली बार उग्रराज के महल का नक्शा देखा तो उसे झटका सा लगा क्योंकि वह जादुई जाल एक नहीं था दो नहीं थे बल्कि कदम कदम पे एक जादुई जाल था जो सिर्फ उग्रराज और उसके सैनिकों पर असर नहीं करता था। 

राजा सुदीर कुछ बोलने ही वाले थे की तभी उसका एक जासूस जादुई सैनिकों के घर के बाहर दौड़ते हुए आता है हालांकि उसे कोई घर नहीं दिख रहा था लेकिन वह  धीमी आवाज में राजा सुदीर,  राजा सुदीर,  अंदर ले लो मुझे आपको एक खास जानकारी बतानी है।  राजा सुदीर उस जासूस की आवाज़ सुन लेते है और झट से घर के अंदर ले लेते है और पूछते है की कैसी जानकारी है ? वह जासूस बोलता है की अगर आप गोटासुर के १ मिल की दुरी पर ना रहकर उसके अंदर एक कदम भी आगे बढ़ाया तो  गोटासुर को बचाने के लिए उग्रराज  गोटासुर के पास प्रकट हो जाएगा वो भी अपने आप।   पर इसके लिए उग्रराज को महल के अंदर रहना पड़ेगा।  यह बात सुनकर राजा सुदीर ने अब ठान ली की अब हम सब महल में एक दिन के बाद ही जाएंगे।  उस जासूस ने एक और बात बताई,  उस जमीन पर जो दूर अंतरिक्ष में है वहा पर  गोटासुर को संभालने के लिए  दुनिया के २० सबसे ताकतवर जादूगर हर वक्त  गोटासुर की सुरक्षा के लिए तैनात रहते है, वे उस जमीन पर कही भी छुप  सकते है। यह ख़ुफ़िया जानकारी देकर जासूस अपने काम के लिए निकल जाता है।  

राजा सुदीर

राजा सुदीर को यह ख़ुफ़िया जानकारी सुनकर थोड़ा झटका लगा क्योंकी वहां पर बहुत ताकतवर जादूगर है।  राजा सुदीर ने सोचा क्यों न जादूगर अकरम को उस जमीन पर ले जाए ?  लेकिन तभी राजा सुदीर के मन में एक सवाल आता है की अगर वह जादूगर अकरम को उस जमीन पर ले भी जाते है, तो वो उन ताकतवर जादूगरों से कैसे लड़ेगा।   इस समस्या का हल निकालने के लिए राजा सुदीर महाराज सूर्यकान्त को बुलाते है और पूछते है की उग्रदेश के पास में कोई जादुई गुरु  है क्या ?  महाराज सूर्यकान्त कहते है की हाँ। वह गुरु उग्रदेश के पास वाले जंगल में रहते है और उनकी एक खासियत है की वो अपने हर शिष्य को बस एक दिन में ही दुनिया का सबसे ताकतवर जादूगर बना देते है। यह सुनकर राजा सुदीर को बहुत ख़ुशी होती है और वो जादुई सैनिको को यह आदेश देते है की जादूगर अकरम को खबर कर दो की वो अभी इसी वक्त जादुई गुरु  के पास चला जाए और उधर से सीधा मेरे पास आए । जादूगर अकरम  के पास ये खबर आते ही वह झट से अपना सामान बांध के उग्रदेश के पास वाले घने जंगल में निकल पड़ता है जहाँ पर वह जादुई गुरु  रहते है, कुछ समय बाद वहापर पहुंच जाता है।  जादूगर अकरम  वहा पर जादुई गुरु  को ढूंढता है पर उसे जादुई गुरु  कहीं नहीं मिलते और वह एकदम से बेहोश हो जाता।

बेहोश जादूगर अकरम

बेहोशी में जादूगर अकरम के पैरो पर कुछ अनजान आदमियों ने एक डिब्बी में से पानी की बुँदे डाली जो एक हार से जुडी हुई थी और वह हार उसके गले में डाल दिया जिसके कारन जादूगर अकरम उड़ने लगता है। जब जादूगर अकरम को होश आता है तब वह खुदको जमीन से एक किलोमीटर ऊपर हवा में उड़ते हुए देखता है,  जादूगर अकरम एकदम डर जाता है लेकिन जब थोड़ी देर बाद वह गिरता नहीं तो उसके जान में जान आती है।  जादूगर अकरम को वहां पर बहुत सारे जादुई शिष्य दिखते है । वहां पर राजा सुदीर रात के समय में आसमान में वो जमीन ढूंढ रहे थे। वह सोच रहे थे की एक दिन तक हमें तैयार हो जाना चाहिए।  जादुई दुनिया में  जादूगर अकरम अपने पुरे शरीर का निरीक्षण करता है, देखता है की क्या  उसके शरीर पर कोई बदलाव तो नहीं हुआ है।  उसे आश्चर्य होता है जब वह खुद के गले पर एक हार बंधा देखता है जिसपर  तीन छोटी छोटी डिब्बिया है।

तीन छोटी छोटी डिब्बिया

जादूगर अकरम जादुई  गुरु को ढूंढने लगता है  जब उसे जादुई गुरु  दूर से दिख जाते है  तो वो तेजी से हवा में उड़कर उनके पास चला जाता है।  हवा में उड़ते वक्त वह महसूस करता है की जमीन पर भागने से दस गुना ज्यादा तेज हवा में भाग सकता है।  उसे इस बात से बहुत ख़ुशी होती है। जब जादूगर अकरम  जादुई गुरु तक पहुंच जाता है तब जादुई  गुरु उसे ये कहते है की ये बात कभी मत भूलना की तुम्हारे गले में जो हार है उसे तुम कभी मत निकालना क्योंकि ये हार तुम्हें  हर खतरे से बचाता  रहेगा और ये डिब्बिया तुम्हारी बहुत मदद करेगी। पहिली डिब्बी पर तुम्हे आसमान का चित्र दिखेगा, जब तुम इस डिब्बी में से एक बून्द अपने पैरो पर डालोगे तो तुम एक किलोमीटर ऊपर उड़ जाओगे, तुम चाहो तो कितने भी बुँदे डाल सकते हो लेकिन तुम उतने किलोमीटर ऊपर उड़ जाओगे। दूसरी डिब्बी में तुम्हे समुद्र का चित्र दिखेगा, अगर तुम्हें समंदर के एक मीटर नीचे जाना है तो तुम इस डिब्बी में से एक बूंद अपने पैरो पर डाल देना, तुम समंदर के एक मीटर नीचे पहुँच जाओगे।  तुम जितनी भी बुँदे इस डिब्बी से डालोगे उतने ही मीटर तुम समंदर के नीचे चले जाओगे। तभी जादूगर अकरम जादुई गुरु  से पूछता है की अगर मुझे फिरसे जमीन पर खड़ा होना हो तो मै क्या करू?  जादुई गुरु  कहते है – शिष्य अभी मेरी बात पूरी नहीं हुई है, मै यही बता रहा था की  तुम्हें जब भी आसमान से नीचे आना हो या समंदर से ऊपर जाना हो,  तो तुम जितने भी किलोमीटर ऊपर हो या समंदर से नीचे हो  तुम्हे उतनी  ही बुँदे तीसरी डिब्बी से अपने पैरो पर डालना है।  हवा में उड़ते उड़ते या समंदर में तैरते तैरते कभी घबराना नहीं क्यों की तुम्हे साँस लेने में कोई तकलीफ नहीं होगी,  जादुई गुरु  उसे एक जादुई कागज भी देते है जिसमे रोज का टाइम टेबल अपने आप सुबह ६ बजे से दिखना शुरू हो जाता है।

 अगले भाग में पढ़िए – जादुई दुनिया में जादूगर अकरम

राजा सुदीर की साहस कथा -(Part 5 of 9)

गोटासुर आखिर है कहा ?

यह कहानी का पाँचवा भाग है। इस कहानी को मैंने 9 भागों में बाँटा  है। मुझे इन 9 शब्दों (राजा, शैतान, सेना, प्रजा, हाथी, घोडा, भाला, झंडा, लड़ाई) से  कहानी बनाने का  टास्क मिला था । जिस  कहानी को  मुझे दो पन्नों में लिखना था वह 2 , 3 , 4 , 5 . . . .   करते करते रजिस्टर के 30 पन्नों की बन गयी।  यह 30 पन्ने अचानक नहीं लिखे गये क्योंकि कई बार बिच बिच  में मैंने इस कहानी को लिखना छोड़ दिया था , फिर वह गैप कभी कभी एक दो महीनों की भी हो जाती थी ।  मै  लिखता गया , लिखता गया , लिखता ही गया ……..   और इसी लिखने के सफ़र में एक साल कैसे निकल गया मुझे पता ही नहीं चला।  ऐसे करते करते आख़िरकार इस कहानी को मैंने अंतिम मुक़ाम तक पहुंचा ही दिया। इस कहानी के चित्र मैंने और मेरी मम्मी ने बनाये , जिसे करीबन दो महीने लगे थे। आशा करता हूँ की आप इस कहानी के सारे भाग पढ़ेंगे और इसका लुफ़्त भी उठाएंगे। आपके सुझाव मुझे भविष्य में और बेहतर लिखने के लिए प्रेरणा देंगे।  

आरव राउत 

शुरू में जासूस  किसी को पहचान नहीं पाते है लेकिन असली रूप में आने के बाद तुरंत पहचान लेते है। तभी जासूस  राजा सुदीर को कहते है की ये जगह आपके लिए सुरक्षित नहीं है इसलिए हम अमजु जिसने आपको बहुत  सारी जादुई मुद्राए दी थी और जो उग्रदेश का सबसे अमीर आदमी है उसके पास एक नौकर भिजवाते है, और उससे कहलाते है की राजा सुदीर आपके पास आने वाले है।  जब अमजू ने यह बात सुन ली तो उसने अपने घर में कड़ी सुरक्षा रखवा ली।  कुछ देर तक अमजु दरवाजे पर खड़े होके राजा सुदीर का इंतजार करने लगता है। उसी वक्त महाराज सूर्यकान्त बूढ़े आदमी के वेष में और राजा सुदीर थैले के वेष में अमजु के पास आते है,  अमजु उन दोनों को हकालने ही वाला था की तभी महाराज  सूर्यकान्त बोलते है की मै राजा सुदीर का ससुर हूँ। महाराज सूर्यकान्त की आवाज सुनकर अमजु अपने आप को दोषी समझता है की क्यों वह उन दोनों को पहचान नहीं पाया, बिना समय गवाए वह उन दोनों को घर के अंदर लेता है। उन दोनों से कहता है आप  ऐसे वेश में आओ ताकि भविष्य में  मुझसे ऐसी भूल ना हो।  फिर वो दोनों अपना वेश बदलते है और अमीर जासूस के सौ जादुई मुद्रा वापस कर देते है। तभी अमजु बोलता है कि नहीं मुझे इसकी जरूरत नहीं है , हालांकि  आपको इसकी जरुरत आगे कभी भी हो सकती है।  अब उनको यहां पर कोई खतरा नहीं था। अमजु राजा सुदीर और महाराज सूर्यकांत से उस भूल के लिए माफ़ी मांगता है और उनको सभी अमीर लोगों की रहने की जगह बता देता है। 

अमजू और दोनों राजाओं की मीटिंग

वह कहता है की

मुझे अभी अभी एक नयी और बेहद काम की खबर मिली है,  आपको तो पता ही होगा की उग्रराज तीन दिन बाद अपनी प्रजा को देखने उग्रदेश के मुख्य शहर में जाने वाला है लेकिन महल के एकदम पास एक घर है जो किसी को नहीं पता सिवाय आपके उन पांचो जादुई सैनिकों के। आपको कोई इस घर के बाहर देख ना सके इसलिए मै सभी अमीर आदमियों को ये बोलता हु की तीन दिन बाद कोई भी अपने घर से बाहर न निकले । 

अमजु

अब तुम दोनों मेरे बड़े से घर में कहीं भी घूम सकते हो। तभी राजा सुदीर ने अमजु से पूछा कि – क्या तुम यहाँ पर मेरे पांच जादुई वफादार सैनिकों को बुला सकते हो? अमजु ने कहा कि हाँ , जरूर। 

फिर उन जादुई सैनिकों को बुलाया गया और राजा सुदीर के पास भेज दिया। वहां पर राजा सुदीर और महाराज सूर्यकांत बैठे थे। राजा सुदीर ने उनको पूछा की महल के पास तुम्हारा कोई घर है वो भी सुरक्षित ? उन्होंने कहा हां वो घर आज तक का सबसे सुरक्षित घर होगा। राजा सुदीर ने एक और प्रश्न पूछा कि वहां पर हम दोनों की रहने की जगह है ? उन्होंने कहा हाँ। तभी वहा पर राजा सुदीर के पचास वफ़ादार सैनिक आ जाते है। राजा सुदीर ने एक और प्रश्न पूछा की – क्या वहां पर इन दस लोगों के लिए भी रहने की व्यवस्था होगी ? उन्होंने फिर से हाँ कहा। राजा सुदीर ने महाराज सूर्यकान्त को बताया की हम वैसे ही उस सुरक्षित घर तक जा सकते है जैसे हम लोग यहाँ तक आये है और बाकी के सैनिक हमें सुरक्षित रखेंगे। महाराज सूर्यकान्त को ये बात पसंद आई और उन्होंने  ये तय भी कर दिया की हम ऐसे ही  सुरक्षित घर में जाएंगे।  तय होने के बाद राजा सुदीर ने उसके चालीस सैनिकों को बताया की तुम सब महल के चारो तरफ़  फ़ैल जाओ,  १७ लोग अमजु के घर एक दिन के लिए रुक जाते है।  अगले  दिन के सूरज की पहली किरण के साथ  फिर वो अमजु के घर से निकल पड़ते है और भीड़ में ग़ायब हो जाते है। उस रात को हुई बात के मुताबिक जादुई सैनिकों के एकदम सुरक्षित घर में चले जाते है।  वहा पर वो जादुई सैनिक राजा सुदीर को एक बेहद खास जानकारी देते है।

जादुई सैनिक बताता है की गोटासुर महल के ठीक ऊपर अंतरिक्ष में बहुत दूर एक तैरती हुई जमीन पर है इसलिए वह जमीन हमें नहीं दिखेगी, तभी राजा सुदीर ने एक सवाल पूछा की हम वहां तक कैसे जा सकते है ? वह पांचो एक साथ जवाब देते है – एक सटीक गेंद जैसी आकृति चाहिए और उसे महल के बीचों बीच एक जगह है वहां पर रख के उस जमीन के बारे में सोचा गया तो हम वहां तक पहुंच सकते  है।

एक सटीक गेंद जैसी आकृति

राजा सुदीर ने फिर से एक सवाल पूछा की वह चीज कहां पर है ? सभी ने एक ही उत्तर दिया,  उग्रराज  के कमरे में।  यह सुनकर राजा सुदीर को जरा खुशी हुई और कहा की अगर हम वहाँ पर पहुँच गए तो आगे क्या होगा ? आगे हमें पता नहीं लेकिन उग्रराज ने हम जादुई सैनिको को ये बताया था की उस जमीन पर दुनिया के बहुत सारे ताकतवर जादूगर है। राजा सुदीर ने कहा की अगर वह गेंद जैसी दिखने वाली आकृति उग्रराज के कमरे में है तो चोरी करने के अलावा हमारे पास दूसरा रास्ता नहीं होगा।  जादुई सैनिको ने भी कहा की चोरी करने के अलावा हमारे पास और कोई रास्ता नहीं है। हमें चोरी उग्रराज के जाने  के बाद करनी  पड़ेगी और २४ घंटे में  उस जमीन पर पहुंचना होगा क्योकि उग्रराज २४ घंटो के अंदर अपने महल वापस आने वाला है।

अगले भाग में पढ़िए – ख़ुशी में भी एक गम

राजा सुदीर की साहस कथा -(Part 4 of 9)

“चकमक चकमक ची ची चू चू, बदल जाए यह मेरा मुँह”

यह कहानी का चौथा भाग है। इस कहानी को मैंने 9 भागों में बाँटा  है। मुझे इन 9 शब्दों (राजा, शैतान, सेना, प्रजा, हाथी, घोडा, भाला, झंडा, लड़ाई) से  कहानी बनाने का  टास्क मिला था । जिस  कहानी को  मुझे दो पन्नों में लिखना था वह 2 , 3 , 4 , 5 . . . .   करते करते रजिस्टर के 30 पन्नों की बन गयी।  यह 30 पन्ने अचानक नहीं लिखे गये क्योंकि कई बार बिच बिच  में मैंने इस कहानी को लिखना छोड़ दिया था , फिर वह गैप कभी कभी एक दो महीनों की भी हो जाती थी ।  मै  लिखता गया , लिखता गया , लिखता ही गया ……..   और इसी लिखने के सफ़र में एक साल कैसे निकल गया मुझे पता ही नहीं चला।  ऐसे करते करते आख़िरकार इस कहानी को मैंने अंतिम मुक़ाम तक पहुंचा ही दिया। इस कहानी के चित्र मैंने और मेरी मम्मी ने बनाये , जिसे करीबन दो महीने लगे थे। आशा करता हूँ की आप इस कहानी के सारे भाग पढ़ेंगे और इसका लुफ़्त भी उठाएंगे। आपके सुझाव मुझे भविष्य में और बेहतर लिखने के लिए प्रेरणा देंगे।

आरव राउत

आम जादुई आदमी को उग्रराज सहज अपने राज्य के सिमा के अंदर जाने देगा इसलिए पहले हमें आम जादुई आदमी के जादू, जादूगर अकरम से सीखना होगा। तुममे से कोई जादूगर अकरम को बुलाओ और कोई महल के नीचे सुरंग में से हमारे सबसे ताकतवर हथियार लाओ फिर मै आगे की योजना बताऊंगा।

तभी वहां पर महाराज सूर्यकान्त जी आते है और राजा सुदीर ने महाराज सूर्यकान्त जी को वहाँ तक योजना बताई जहां तक वफादारों को बताई थी और ये भी कहा कि कुछ देर में जादूगर अकरम और हमारे ताकतवर हथियार लाए जाएंगे।

राजा सुदीर और सूर्यकान्त जी की मीटिंग

ये कहते ही जादूगर अकरम आ गया फिर राजा सुदीर ने जादूगर से  कहा कि तुम हमारे सैनिकों को आम जादुई आदमी के जादू सिखाओ और मुझे कुछ जादुई चीजे दो जो उग्रदेश में कोई खरीद पायेगा तो जादूगरने हाँ कहा और सबको जादू सीखा दिया और राजा सुदीर ने जो चीजे माँगी थी वो भी दे दी। राजा सुदीर का काम हो गया था बस उनको सबके लिए एक जादुई मुद्रा चाहिए थी ताकि उनके पास एक असली जादुई आदमी की पहचान आए।  राजा सुदीर उग्रदेश में ५० सैनिक ले जाने वाला था। उसने एक सैनिक को बुलाया और कहा की उग्रदेश के सभी जासूसों को बता दो की हमें ५१ मुद्रा चाहिए, तभी उस सैनिक ने एक सवाल पूछा की हम तो ५२ लोग रहेंगे तो ५१ जादुई मुद्रा क्यों ? तभी राजा सुदीर बोले की आगे तुम्हे पता चल जाएगा। फिर वह सैनिक एक जासूस के पास जाता है और कहता है की राजा सुदीर को ५१ जादुई मुद्रा चाहिए। यह सुनने के बाद वह जासूस  सीधे उग्रदेश के सबसे अमीर जासूस जिसका नाम अमजु है उसके पास एक खत लिखता है की राजा सुदीर को ५१ जादुई मुद्रा चाहिए। तो उस अमजु ने उसके उत्तर में लिखा की “राजा सुदीर आपको बस ५१ ही जादुई  मुद्रा चाहिए मै आपको सौ दे देता हु क्यों की मेरे पास तो हजारो जादुई मुद्राए है, अगर बाद में काम पड़े तो उनमे से ले लेना”। खत के साथ साथ अमजु १०० जादुई मुद्रा भी भेज देता है।  वो १०० जादुई मुद्रा और खत राजा सुदीर के पास रात को पहुंचे। फिर राजा सुदीर ने सबको अपने कमरे में बुलाया और योजना सुनानी शुरू की। 

राजा सुदीर

राजा सुदीर कहते है की, अब सभी सैनिक जो यहाँ पर बैठे है वह बिना हिचकिचाते हुए उग्रदेश में घुस सकते है, क्योंकि अब सबके पास जादुई मुद्रा भी होंगी और सब जादू भी सीखे होंगे लेकिन वहा पर मै नहीं जा पाऊँगा क्योंकि उग्रदेश के सभी लोग मुझे अच्छी तरह से पहचानते है।  इसके लिए मेरे पास एक लाजवाब हल है। मै हर वक्त महाराज सूर्यकान्त के पिट पीछे जादुई चादर  को ओढ़के  घूमूँगा ताकि गलती से भी किसी जादुई सैनिक ने या अमीर  लोगोने देख लिया तो उनको मै महाराज सूर्यकान्त जी ने लटकाया हुआ एक थैला दिखूंगा और आम जादुई लोगो को तो मै वैसे भी नहीं दिखूंगा। राजा सुदीर ने ये भी कहा की अब हमारे पास सिर्फ चार दिन ही बचे है। इसके तुरंत बाद राजा सुदीर महाराज सूर्यकान्त को लेकर जादूगर अकरम के पास जाते है और उससे कहते है की महाराज सूर्यकान्त को जादुई मंत्र बताओ जिससे इनका पूरा चेहरा बदल जाए और ये  एक बूढ़े आदमी  जैसे लगे,  मै ये इस लिए कह रहा हु क्योंकी उग्रराज सभी राजाओ को अच्छी तरह से पहचानता है।  जादूगर अकरम महाराज सूर्यकान्त जी को जादुई मंत्र बताता है

“चकमक चकमक ची ची चू चू, बदल जाए यह मेरा मुँह”

इसे कहने वाले का चेहरा पूरी तरह से बदल जाएगा।  तभी जादूगर अकरम राजा सुदीर से पूछता है क्या आपको इस मंत्र की जरूरत नहीं है? राजा सुदीर बोलते है, नहीं मुझे इसकी जरूरत नहीं है।  यह कहने के बाद राजा सुदीर और महाराज सूर्यकान्त  महल में जाकर सो जाते है। 

जादूगर अकरम

अगले दिन राजा सुदीर ने ५ जादुई सैनिकों को बुलाया जो राजा सुदीर के साथ थे लेकिन  इस योजना से अनजान थे, उन्हें कहा गया की वह दरबार के दरवाजे की रक्षा करे,  इस दरवाजे से आने वाले हर आदमी का चेहरा याद रखें, वह सभी ऐसा ही करते है। पहले उस दरवाजे से कुछ आम आदमी गुजरते है लेकिन बीच मे ही महाराज सूर्यकान्त जी इस मंत्र  का –

“चकमक चकमक ची ची चू चू, बदल जाए यह मेरा मुँह” 

उच्चारण करके बूढ़े आदमी में बदल जाते है, राजा सुदीर जादुई चादर  को अपने शरीर पर ओढ़कर महाराज सूर्यकांत के पिट पीछे  चलकर दरवाजे से अंदर आ जाते है।  बाद में जब उन  जादुई सैनिकों को पूछा जाता है की – कौन कौन से लोग उस दरवाजे से अभी गुजरे है ? तो उनके जवाब में  बूढ़े का भी नाम आता है  जिसने एक थैला लटकाया हुआ था।  इससे सभी को ये यकीन हो जाता है की जादुई सैनिको को जादुई चादर  ओढ़े हुए राजा सुदीर सच मे एक थैले जैसे दिखते है।  फिर महाराज सूर्यकांत उन पांचो जादुई सैनिको के सामने यह मंत्र कहते है –

चकमक चकमक ची ची चू चू, हो जाए पहले जैसा मुँह”

और यह कहते ही बूढ़े आदमी से वापस महाराज सूर्यकांत बन जाते है और राजा सुदीर थैले से राजा सुदीर बन जाते है।  यह सब देखकर पाँचो के पाँचो जादुई सैनिक चौंक जाते है तभी राजा सुदीर उनको बोलते है की जल्दी से उग्रदेश के मुख्यद्वार पर खड़े हो जाओ और वहा से दूसरे जादुई सैनिकों को हटवा दो ताकि हम किसी को भी ना दिखे ।  पांचों के पांचो जादुई सैनिकों को महाराज सूर्यकान्त जी का चेहरा  याद रखना होगा ताकि आगे जाकर कोई भूल न हो।  फिर पांचो जादुई सैनिक उग्रदेश के मुख्यद्वार पर खड़े हो जाते है।  राजा सुदीर, महाराज सूर्यकांत और बाकी के पचास लोग पूरी तैयारी करके, ५१  जादुई मुद्रा लेकर एक एक करके उग्रदेश के मुख्य द्वार से उग्रदेश के एक शहर से होते हुए जासूसों के एक छोटे से घर पर ठहर जाते है।

अगले भाग में पढ़िए – गोटासुर आखिर है कहा ?

अमरावतीचा बाल लेखक – आरव

By The Vidarbha News -October 24, 2020

सौ.सुषमा योगेश कोठीकर, सहायक शिक्षिका सरस्वती विद्यालय, अमरावती
News  Published on October 24, 2020

अनेक मोठं मोठ्या लेखकांच्या शर्यतीत एक नाव भविष्यात नक्कीच घेतलं जाईल ते म्हणजे आरव गजेंद्र राऊत ह्याचं. जेमतेम दहा वर्षाचा असून तो अनेक वेगवेगळ्या विषयांवर उत्स्फूर्तपणे लिखाण करतो.त्याचं लिखाण वाचून मनात विचार येतो की ज्या वयात मुलं मैदानावर खेळतात,टी व्ही बघतात त्या वयात आरव लिखाण करतो.म्हणून ह्या छोट्या लेखकाला मी तुमच्यापर्यंत पोचवत आहे.आरव हा माझा विद्यार्थी आहे यावर्षी त्याने आमच्या शाळेत इयत्ता पाचवीत प्रवेश घेतला.दुर्दैवाने ऑनलाइन शाळा असल्याने आमची प्रत्यक्षात भेट होऊ शकली नाही. त्याला मी इयत्ता पाचवीच्या व्हाट्सउप ग्रुपला ऍड केलं आणि त्याच्या बाबांनी मला त्याने लिहिलेले अनेक आर्टिकल त्याचे प्रवासवर्णने पाठवले मला त्याचं कुतूहल वाटू लागलं आणि एक दिवस मी त्याला एक विषय दिला आणि सांगितलं की तू तुझे कोरोना काळातील अनुभव लिही.ते अनुभव त्याने तब्बल दहा पानं भरून लिहिले.मग मलाही वाटलं की आपण आरवचं कौतुक करावं ह्या असामान्य मुलाबद्दल लोकांना कळावं म्हणून त्याच्या घरी जाऊन त्याची प्रत्यक्ष भेट घेतली आणि त्याचा लिखाणाचा प्रवास कसा सुरू झाला ते समजून घेतलं.


आरव गजेंद्र राऊत ह्याचा जन्म २५ जुलै २०१० रोजी झाला त्याचे वडील शैक्षणिक क्षेत्रात काम करत असल्याने विविध ठिकाणी फिरले.त्यामुळे आरव सुद्धा त्यांच्या सोबत फिरला.त्याची आई स्वाती त्याला लहानपणापासून गोष्टी सांगायची,गोष्टीची पुस्तके वाचून दाखवायची आणि ह्या गोष्टी ऐकत ऐकत वाचत वाचत त्याच्या मनात लिखाणाची आवड निर्माण झाली वयाच्या सहाव्या वर्षी त्याने पहिलं एक पण पूर्ण भरून लिहिलं ते एका कथेच्या पुस्तकावर त्याने लिहिलं “जानवरोका मेला”

जानवरोका मेला (05/04/2017)

हळूहळू ही लिखाणाची आवड वाढली आईवडील त्याचं कौतुक करू लागले,त्याला प्रोत्साहन देऊ लागले आणि दोन ओळी लिहिणारा आरव आता पानच्या पानं भरून लिहितो आहे.सुरुवातीला तो कोणत्याही वस्तूंबद्दल ,व्यक्तीबद्दल दोन तीन ओळीत आपले विचार लिहायचा मग विचारांची कक्षा वाढली आणि तो व्यापक झाला त्याच्या मनात येणारे विचार कागदावर मनसोक्त उतरवू लागला आणि हा छोटा लेखक भरपूर लिहू लागला. कविता, कथा,शाळेचे खेळ,शाळेतील आनंद मेळावा,सांस्कृतिक कार्यक्रम, त्याने केलेले प्रवास,वस्तुसंग्रहालयाला दिलेल्या भेटीचे वर्णन, सणवार,शाळेच्या सहली,एअरपोर्ट वरचा अनुभव,वाचलेल्या विविध कथा आणि पुस्तके,रॉकेट बनवून उडविण्याचा अनुभव ,कोविड काळातील अनुभव असं बरंच लिखाण त्याने त्याने आजवर केलं आहे.

कोविड काळातील अनुभव

मेरा रॉकेट क्यू नहीं उडा ह्या त्याच्या रॉकेट उडविण्याच्या प्रवासाचे त्याने वर्णन केले आहे .रॉकेट बनवून ते उडविण्यासाठी त्याने 2 वर्षात एकूण पंधरा प्रयत्न केले पंधराव्या प्रयत्नात त्याचं रॉकेट यशस्वीपणे उडालं आणि हे त्याचे सगळे प्रयत्न त्याने लिहिले आहेत.

मेरा रॉकेट क्यू नहीं उडा

खरंतर त्याचं आणि त्याच्या प्रामाणिक प्रयत्नाचं करावं तेवढं कौतुक कमी आहे.लिखाणा व्यतिरिक्त आरवला योगा करायला आवडते,चित्र काढायला आवडते,भाषण द्यायला आवडते,खेळ खेळायला आवडते आधुनिक तंत्रज्ञान समजून घेऊन ते शिकायला आवडते.त्याचे आर्टिकल, कथा तो लॅपटॉप वर स्वतः टाईप करतो एडिट करतो.त्याला कार्टून मूव्ही बघायला आवडतात .सैनिक आणि मिलिटरी वर आधारित चित्रपट बघायला आवडतात.आरवला मोठं होऊन एक आर्टिस्ट व्हायचं आहे.आई वडिलांसोबत दिल्ली,जयपूर, मुंबई,रायगड अश्या विविध ठिकाणी राहिल्यामुळे त्याच्या भाषेवर हिंदीचा बराच प्रभाव आहे .सुरुवातीला त्याने हिंदीतूनच लिहायला सुरुवात केली नंतर हळूहळू मराठी नीटपणे शिकून तो मराठीतून लिहू लागला.त्याचे वडील त्याला वेगवेगळे शब्दसमूह देऊन कथा लिहायला सांगतात सध्या तो एक कथा लिहितो आहे ज्यात त्याला राजा,राक्षस, सेना,घोडा,मगर,भाला, झेंडा,लढाई,प्रजा,हत्ती इत्यादी शब्द वापरायचे आहेत.त्याची ही कथा आतापर्यंत अठरा पानांची लिहून झाली आहे आणि लवकरच तो ती पूर्ण करून नवीन विषय लिहायला घेणार आहे.

राजा सुदीर की साहस कथा (Part 1 of 9)
राजा सुदीर की साहस कथा (Part 2 of 9)
राजा सुदीर की साहस कथा (Part 3 of 9)

आजच्या मोबाईल ,कम्प्युटर आणि भ्रामक जगात जिथे लहान मुलं फक्त मोबाईल वर गेम खेळतात इंटरनेटवर मनोरंजन करतात त्या युगात आरव मात्र कागद पेन घेऊन लिखाण करतो आहे ही बाब लक्षणीय आहे.मोठं मोठ्या लोकांना आज लिहायला वाचायला कंटाळा येतो आलेला मेसेज कॉपी करून आपलं नाव लिहून पुढे पाठवण्याची सवय लोकांना आहे.अश्या युगात एक लहानगा मुलगा आपल्या लेखनशैलीला विकसित करतोय ही गोष्ट आमच्यासाठी अभिमानास्पद आहे.आरवच्या क्षमता ओळखून त्याच्या आई वडिलांनी त्याला साथ दिली,प्रोत्साहन दिलं त्यासाठी त्यांचं देखील कौतुक व्हायला पाहिजे. लहान मुलं मातीच्या गोळ्यासारखी असतात त्याला हवा तसा आकार देता येतो.त्या गोळ्याला घडवणारा कुंभार जसा असेल तसा तो घडेल कुंभार जितका कारागीर तितकी त्याची वस्तू कलाकुसरीची असेल.त्याप्रमाणेच आरवचे आईवडील उत्तम कारागीर आहेत जे आपल्या मुलाला घडवीत आहेत.त्याला आतापर्यंत शिक्षक सुद्धा चांगले मिळाले ज्यांनी त्याच्या लिखाणाचं नेहमी कौतुक करून त्याला प्रोत्साहन दिलं.

उंची तुझ्या यशाची
गाठील शिखरे नवी नवी
होतील कोवळ्या हातांनी
रचना नवी नवी
उडतील स्वप्ने तुझी
घेऊन पंख नवी नवी
कवेत तुझ्या आसमंत
दिशा मिळेल नवी नवी
हसू असेच फुलू दे
सुखे भेटू दे नवी नवी
जिद्द तुझ्या मनातली
बहरु दे नवी नवी

आज आरव सरस्वती विद्यालयाचा विद्यार्थी आहे भविष्यात तो आमच्या शाळेचं नाव नक्कीच उज्ज्वल करेल अशी मला खात्री आहे.मी स्वतःला खूप नशीबवान मानते की मला असा गुणी,होतकरू आणि हुशार विद्यार्थी मिळाला.भविष्यात तो खूप मोठा लेखक बनेल त्याच्या लेखणीतून उत्तमोत्तम शब्द आणि लिखाण लिहिल्या जाईल ही मला खात्री आहे.

राजा सुदीर की साहस कथा (Part 3 of 9) 

महाराज सूर्यकान्त जी से मदत की याचना 

यह कहानी का तीसरा भाग है। इस कहानी को मैंने 9 भागों में बाँटा  है। मुझे इन 9 शब्दों (राजा, शैतान, सेना, प्रजा, हाथी, घोडा, भाला, झंडा, लड़ाई) से  कहानी बनाने का  टास्क मिला था । जिस  कहानी को  मुझे दो पन्नों में लिखना था वह 2 , 3 , 4 , 5 . . . .   करते करते रजिस्टर के 30 पन्नों की बन गयी।  यह 30 पन्ने अचानक नहीं लिखे गये क्योंकि कई बार बिच बिच  में मैंने इस कहानी को लिखना छोड़ दिया था , फिर वह गैप कभी कभी एक दो महीनों की भी हो जाती थी ।  मै  लिखता गया , लिखता गया , लिखता ही गया ……..   और इसी लिखने के सफ़र में एक साल कैसे निकल गया मुझे पता ही नहीं चला।  ऐसे करते करते आख़िरकार इस कहानी को मैंने अंतिम मुक़ाम तक पहुंचा ही दिया। इस कहानी के चित्र मैंने और मेरी मम्मी ने बनाये , जिसे करीबन दो महीने लगे थे। आशा करता हूँ की आप इस कहानी के सारे भाग पढ़ेंगे और इसका लुफ़्त भी उठाएंगे। आपके सुझाव मुझे भविष्य में और बेहतर लिखने के लिए प्रेरणा देंगे।

आरव राउत 
राजा सुदीर की साहस कथा (Part 1 of 9)
राजा सुदीर की साहस कथा (Part 2 of 9)

जासूस आगे कहता है की जादूगर अकरम की यह बात सुनकर वो दोनों जादुई सैनिक भड़क जाते है और फिर से जादूगर अकरम को मारना शुरू कर देते है। जादूगर अकरम को मरने के डर से मजबूरन ये भी बताना पड़ा की उसने राजा सुदीर को ये जादू बता दिया है। यह बात सुनकर वो दोनो जादुई सैनिक जादूगर अकरम को उग्रदेश की सिमा पर ही छोड़ कर ये ख़बर उग्रराज को बताने दौड़े और इस तरह उग्रराज को यह बात पता चली है। जासूस ये भी कहता है की उस जादूगर अकरम ने अपना काम अच्छे से कर लिया है अब आपकी बारी है। यह कहकर जासूस अपने जासूसी के काम पे निकल जाता है । 

जादूगर अकरम

राजा सुदीर ने सोचा की अब काम बहुत जल्दी करना पड़ेगा, अब मेरा राज्य बचाने  के लिए बस एक महीना ही है। उसके चंद ही मिनिटों के बाद एक सन्देश वाहक आया और उसने वह सारी जानकारी बता दी जो राजा सुदीर को चाहिए थी। उसने कहा की उग्रराज पांच दिनों के बाद अपने राज्य में अपनी प्रजा को देखने आएगा और उसके साथ  कुछ जादुई सैनिक भी रहेंगे, और जहा तक अमीर लोगो की बात है वह राज्य में कहीं नहीं घूमते ज्यादातर देर वह अपने घर में,  नहीं तो एक खास जादुई बगीचे में जाते है। वहां पर आम लोग तो बिल्कुल नहीं जा सकते सिवाय अमीर लोगो के क्योकि उसके अंदर जाने का दाम बहुत ज्यादा है और ये दाम सिर्फ अमीर लोग ही दे सकते है। तभी राजा सुदीर ने पूछा की उन अमीर लोगों का पता और बगीचे का पता क्या है? सन्देश वाहक ने कहा की ये बात आपको उग्रदेश में जाकर वहाँ के जासूसों से पता चल जाएगी। फिर राजा सुदीर ने अपने सभी वफादार साथियों को बुलाया और उनसे कहा की हमें पांच दिनों तक अपना काम ख़तम करना पड़ेगा, अगर तब तक नहीं हुआ तो छटे दिन हम अपना काम नहीं कर सकते। फ़ौरन हमारे ससुर सूर्यकान्त जी को एक खत भेजो जिसमे लिखा हो की मुझे आपकी कुछ दिनों के लिए जरुरत है इसलिए आप फ़ौरन मेरे सौम्य देश में आइए।

महाराज सूर्यकान्त जी

राजा सुदीर को और उसके ससुर जी को गुप्त संदेश भिजवाने की कला आती है और वो उसमे माहिर भी है राजा सुदीर ने वो सन्देश एक ऐसे कागज पे लिखा जिसको आग के ऊपर गर्म करने से वो गुप्त संदेश धीरे धीरे दिखने लगता है।   इसलिए राजा सुदीर ने वो लिखा हुआ खत अपने पास मंगवाया और उसपे गुप्त संदेश लिखा और वो महाराज सूर्यकान्त जी को भेज देता है। 

महाराज सूर्यकान्त के पास वो संदेश कुछ ही घंटो में पहुंच गया और उन्हें भली भांति पता है की राजा सुदीर भी गुप्त सन्देश लिखने में माहिर है, इसीलिए वो लिखा हुआ सन्देश पढ़कर उस कागज को गरम करने के लिए भेज देते है। गर्म होने के बाद उन्होंने वो कागज मंगवाया। राजा सुदीर ने उसपे लिखा था की –

महाराज सूर्यकान्त जी मुझे आपकी बहुत जरूरत है क्यों की मेरे राज्य पे खतरा मंडरा रहा है मुझे उग्रदेश के गोटासुर को लेकर उसे पहले जैसा जीन्न बनाना है क्यों की वह किसीको भी ख़तम कर सकता है अगर हमने गोटासुर को जिन्न बना दिया तो मेरे, आपके और हमारे रिश्तेदारो के राज्यो पे कोई खतरा नहीं रहेगा। मैंने आपको इसलिए बुलाया है क्यों की मुझे आप पे सबसे ज्यादा भरोसा है। अगर आप को अपने राज्य की पीढ़ियों तक सुरक्षा चाहिए तो आप ऐसा ही एक गुप्त संदेश मुझे भेजो।

राजा सुदीर

यह पढ़कर महाराज सूर्यकान्त ने राजा सुदीर के ही जैसे एक कागज पर लिखा की –

मैं एक दो दिन तक आ जाऊंगा, तब तक राजा  सुदीर  तुम अपना काम जारी रखो मेरी चिंता मत करो

महाराज सूर्यकान्त

राजा सुदीर के पास ये सन्देश भी जल्दी ही पहुंच गया।  राजा सुदीर ने भी महाराज के जैसे ही किया और उन्हें गुप्त सन्देश दिख गया। राजा सुदीर ने अपने वफादारों को बुलाया और उनको पूछा की जासूसों के पास उग्रदेश में रहने के लिए एक घर है क्या ? लेकिन इसके बारे में किसी को पता नहीं था।  तो राजा सुदीर ने एक व्यक्ति को बुलाया जिसका नाम खब्जूस है, खब्जूस के पास उग्रदेश के जासूसों की सारी खबरें रहती है। खब्जूस से भी राजा सुदीर ने वही सवाल पूछा जो उसने वफादारों को पूछा था, उसने हाँ में जवाब दिया तो फिर राजा सुदीर अपने वफादारों से कहता है की तुम्हे पता ही होगा की किसी भी राज्य का राजा उग्रराज की अनुमति के बगैर उग्रदेश में घुस नहीं सकता और वो मुझे तो बिल्कुल नहीं जाने देगा, मुझे देखते ही मार देगा इसलिए मुझे और तुम्हें उस राज्य में छिपकर जाना होगा।

अगले भाग में पढ़िए – “चकमक चकमक ची ची चू चू, बदल जाए यह मेरा मुँह”