मैप

१७ जुलाई २०१७ – भारत में बहुत सारे  राज्य है जैसे की जम्मू एंड कश्मीर, हिमाचल प्रदेश , पंजाब। भारत में २९ राज्य है और ७ केंद्र शासित प्रदेश है। भारत के पास वाले देशो का नाम अफ़ग़ानिस्तान ,पाकिस्तान ,म्यांनमार ,बांगलादेश, नेपाल, भूटान और श्रीलंका है। मै भारत के मैप का एक चक्कर रोज लगाता हूँ।  भारत के मैप में कुछ बड़े राज्य है और कुछ छोटे राज्य है। बड़े राज्यो  के नाम राजस्थान, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक और छोटे राज्यों के नाम दमन एंड दीव, लक्षद्वीप, अंडमान और निकोबार आइलैंड्स। मै  दिल्ली में रहता हु लेकिन मेरा घर महाराष्ट्र में है।  मै महाराष्ट्र में अमरावती में रहता हु। अमरावती के आस पास के ज़िले है वर्धा, यवतमाळ, नागपुर और अकोला। 

पूर्व दिशा में ७ राज्य है जिन्हे ७ बहने कहते है-जिनका नाम है  अरुणाचल प्रदेश ,मिजोरम ,नागालैंड ,मणिपुर ,मेघालय , त्रिपुरा और आसाम। मुझे मैप देखना सबसे अच्छा लगता है। अरुणाचल प्रदेश में झिरो नाम का शहर है। और भारत के प्रधान मंत्री  गुजरात के है । गुजरात में मीठापुर,  जामनगर,  राजकोट और द्वारका ये शहर है। उसमे से मीठापुर में मीठ की बहुत बड़ी कंपनी  है। भारत के समुन्दर के किनारे ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, केरल,,महाराष्ट्र ,गोवा, कर्नाटक है। इन राज्यों को समुन्दर का किनारा नहीं है – जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश ,उत्तर प्रदेश ,उत्तराखंड ,पंजाब , राजस्थान ,गुजरात बिहार, सिक्किम ,पश्चिम बंगाल ,अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मिजोरम, त्रिपुरा, मणिपुर।

Original copy of the page from the diary
Original copy of the page from the diary

मेरे मन के सवाल

१८ फेब्रुअरी २०१८ – मै एक लड़का हूँ। मेरे मम्मी, पापा का नाम स्वाति और गजेंद्र है। मेरे पापा के पापा एक पुलिस ऑफिसर थे। उनका नाम था सखारामजी राउत और मेरे पापा के मम्मी का नाम निर्मला है। मेरे पापा के पापा सखारामजी राउत अब इस दुनिया में नहीं है। 

 पर चिंता की कोई बात नहीं है क्योकि जब वह हमारी इस दुनिया से स्वर्ग में चले गए तभी उनकी आत्मा एक नए शरीर में और एक माँ के पेट में चली गई।

उनके शरीर पर कुछ नहीं हुआ था तो उन्हें एक चिता पर जलाया क्यों ? गजानन महाराज के शरीर को कुछ नहीं हुआ था तो लोगों ने उन्हें एक समाधि क्यों दी?  तो मेरे पापा के पापा के शरीर को कुछ नहीं हुआ था तो उन्हें जलाया क्यों? मेरे दिमाग का यह सवाल आज तक का सबसे मुश्किल सवाल है। मेरे दादाजी मरे तो उनकी तेरहवीं क्यों की और तेरहवीं का मतलब भी नहीं पता। मुझे यह भी आज तक का इतना मुश्किल सवाल लगा।

Original copy of the page from diary

भूतनी का सपना

15 सितम्बर 2017 की रात मै जल्दी ही सो गया। उस रात को मैने  एक भूतनी का सपना  देखा। सपने में मै थोड़ी देर खेलता रहा तब सपना शुरू नहीं हुआ था। जब मैंने कुछ देर खेल लिया उसके बाद मेरा सपना शुरू हुआ।

सपने में मैंने देखा की मै खेलने के बाद घर जा रहा था।  घर जाते वक्त मुझे बीच में बहुत डर लग रहा था, तब मैंने एक भैया को बोला की मुझे घर तक छोड़ दो। उस भैया का नाम अभिषेक था।  तो उन्होंने मुझे गार्ड के पास छोड़ दिया।  उन्होंने बोला मैंने दिए हुए चॉकलेट घर पे खा लेना।  उसके बाद मै घर जाते वक्त फिर डर  गया तो मैंने एक भैया को बोला आप मुझे घर छोड़ दोगे क्या?  तो उन्होंने हा बोला।  उनको दुसरो की मदत करना अच्छा  लगता है।  जाते  वक्त मै आगे आगे चल रहा था और वह भैया पीछे पीछे चल रहे थे। उस भैया का नाम सोहम था।

फिर उन्होंने बोला अब इसके आगे तुम ही जाओ। मैंने उसके आगे एक कदम रखा तभी मैंने एक झूले पे गोला देखा तो मै इतना चिल्लाया….इतना चिल्लाया की सारी सोसाइटी को आवाज गया पर वहा कोई नहीं आया।  वहा सोहम भैया भी मेरे पीछे ही खड़े थे। जब मै चिल्लाया था तब मेरे  सामने एक भूतनी एक किले पे खड़ी थी।

उस भूतनी के दो हाथ, दो पैर और उसकी एक लकड़ी की नाक थी। उसका एक असली मुँह और एक कंकाल का मुँह था और एक गर्दन और उसके फटे हुए कपडे थे। सोहम भैया उस भूतनी से डर  गए और एक इमारत के पीछे छुप गए। पर मै उस भूतनी से थोड़ा ही डरा।  उस भूतनी के नाक का रंग भी हमारे रंग जैसा ही था। मुझे लगा वह मुझे मारना चाहती है पर वह तो सिर्फ मेरी आँखे लेना चाहती थी। मै उसका पहला शिकार था। उसे सब  दिख सके इसलिए वह मेरी आँखे लेना चाहती थी।

फिर मैंने उसकी लकड़ी की नाक  तोड़ दी और उसे मारने लगा।  जब मैंने उसकी नाक तोड़ी तब उसकी नाक का रंग एक लकड़ी के रंग में बदल गया। फिर मै उसे पत्थर मारने लगा पर मेरा निशाना चुकता रहा आखिर मैंने उसे मार कर गिरा ही दिया लेकिन देखते ही देखते वह भूतनी फिर से खड़ी हो गई। भूतनी को मुझ पे गुस्सा आया।  गुस्सा आने के वज़ह से वह एक जादुई मंत्र बोलने लगी।  उसके हाथो में से कुछ धागे निकलने लगे फिर मेरा सपना वही पे ख़त्म हो गया। फिर मै नींद से जाग गया।

Original copy of the write up from diary (page 1 of 2)
Original copy of the write up from diary (page 2 of 2)

पाण्यात राही मासे पोहायला

पाण्यात राही मासे पोहायला 
पण जमिनीवरचे प्राणी जमिनीवर खेळायला 
पण त्या दोघात आहे खूप फरक 
माश्यांना असते चमक 

पाण्यात राही मासे पोहायला 
पण जमिनीवरचे प्राणी जमिनीवर खेळायला 

जमिनीवर नाचे मयूर थुई, थुई, थुई, थुई, थुई
जर वाघोबा आला तर सगळे प्राणी गप्प होई 
हनुमान चडे झाडावर भर, भर, भर, भर, भर 
जर वाघोबा आला तर पकडता येईना झाडावर 

पाण्यात राही मासे पोहायला 
पण जमिनीवरचे प्राणी जमिनीवर खेळायला 

काही प्राणी असेही असतात 
जे राहु शकतात जमिनीवर आणि पाण्यातही 
ते आहे जे चालू शकतात आडवे 
ते खेकडे राजांचे मावडे  

पाण्यात राही मासे पोहायला 
पण जमिनीवरचे प्राणी जमिनीवर खेळायला 

जे मासे मोठे त्यांचे कल्ले मोठे 
ते जाऊ शकते दुर पण दुर कोठे ?
दुर म्हणजे नदी महासागरात 
पण ते महासागर बनत होते कोठे ?

पाण्यात राही मासे पोहायला 
पण जमिनीवरचे प्राणी जमिनीवर खेळायला 

(आरव राऊत, ४ ऑगस्ट २०१९)

Original copy of the poem

आठवते मला ते पावसाचे दिवस

ही कविता मी चौथीत असताना, ३० जुलै २०१९ रोजी लिहिली. त्या वेळेस अमरावतीत खूप जोराचा पाऊस पडत होता. मला माणगावमध्ये घालवलेले पावसाळ्याचे दिवस आठवले. शाळेतून आईसोबत येताना उसाचा रस पिणे, खिडकीतून खेकडे दिसणे आणि पावसात छमछम खेळ खेळणे हे मला खूप आवडायचे. त्या आठवणींवरून मी ही कविता लिहिली. काही वेळा मला शब्द सुचत नव्हते, तेव्हा बाबांनी मदत केली. अशा प्रकारे ही कविता तयार झाली…..

आठवते मला ते पावसाचे दिवस 
जेव्हा होतो मी राहायला माणगांव ला
मग त्या वेळी होतो मी जंगम शाळेत शिकायला
शाळेतून येताना पित होतो मी रस उसाचा

आठवते मला ते पावसाचे दिवस
जेव्हा होतो मी राहायला माणगांव ला

बाहेर गार्डन मध्ये खिडकीतून दिसत मला खेकडे चार
मग मी चादर ओढून झोपून जायचो हवेत गार
झोपल्यावर दिसाची स्वप्न खेकळ्याचे वारंवार
दुसऱ्या दिवशी सांगायचो मी आईला स्वप्नांचा सार

आठवते मला ते पावसाचे दिवस
जेव्हा होतो मी राहायला माणगांव ला

भर पावसात मी खेळायचो छम, छम, छम, छम, छम, छम
डबक्यात मारायचो उड्या धम, धम, धम, धम, धम, धम
घसर गुडी वरून पाणी पडे झूम, झूम, झूम, झूम, झूम, झूम
सुगंध यायचा मातीचा घम, घम, घम, घम, घम, घम

आठवते मला ते पावसाचे दिवस
जेव्हा होतो मी राहायला माणगांव ला

(आरव राऊत, ३० जुलै २०१९)
Original copy of the poem
Now I am in 10th Grade in Jawahar Navodaya Vidyalaya Amravati, Maharashtra